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ई-टेंडर घोटाले में अब होगी अधिकारियों से पूछताछ

11/06/2019


मनीष खरे को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा
भोपाल (ईएमएस)। प्रदेश के ई-टेंडर घोटाले में अब अधिकारियों से पूछताछ शुरुआत होने वाली है। टेंडर प्रक्रिया के समय जो भी अधिकारी पदस्थ रहे होंगे, सभी से पूछताछ की जाएगी। सूत्रों ने बताया कि मनीष खरे सहित ऑस्मो के संचालकों से पूछताछ में अब तक जो भी तथ्य सामने आए हैं, उनके आधार पर नौकरशाहों से पूछताछ होगी। मनीष खरे को ईओडब्ल्यू ने पूछताछ के बाद एडीजे शिवबालक साहू की अदालत में पेश किया। अदालत ने खरे को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने के आदेश कर दिए। सूत्रों की माने तो मध्य प्रदेश के ई-टेंडर घोटाले में शामिल एंट्रस सिस्टम्स लिमिटेड कंपनी मप्र ही नहीं बिहार, गोवा, केंद्र शासित राज्यों लक्षद्वीप, अंडमान सहित देश के 29 सार्वजनिक उपक्रमों में सॉफ्टवेयर का काम करती है। यह संदेह जताया जा रहा है कि मप्र की तरह कंपनी की कार्यप्रणाली से दूसरे राज्यों व सार्वजनिक उपक्रमों में भी ई-टेंडर टेंपरिंग तो नहीं हुई। इसको लेकर आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) मुख्यालय द्वारा संबंधित राज्यों और सार्वजनिक उपक्रम के अधिकारियों को पत्र लिखकर जांच करवाने की सलाह दी जा रही है। वहीं, ई-टेंडर घोटाले में आरोपित मनीष खरे को अदालत ने न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
मप्र में ई-प्रिक्योरमेंट पोर्टल का काम करने वाली टीसीएस की सहयोगी कंपनी एंट्रस सिस्टम्स लिमिटेड को लेकर ईओडब्ल्यू ने जांच के दौरान पाया कि उसका कारोबार मध्य प्रदेश ही नहीं बिहार, गोवा, केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप व अंडमान सरकारों में भी फैला है। इसके अलावा 29 सार्वजनिक उपक्रमों में भी इसी तरह का काम है। इन सार्वजनिक उपक्रमों में इसरो, आयकर, नोट प्रेस से लेकर भारतीय स्टेट बैंक व इलाहाबाद बैंक जैसे संस्थान हैं। ईओडब्ल्यू के महानिदेशक केएन तिवारी ने बताया कि एंट्रस कंपनी सॉफ्टवेयर का काम करती थी। उसका मप्र के अलावा जिन चारों राज्यों व सार्वजनिक उपक्रमों में कारोबार है, वहां पत्र लिखकर कंपनी के कामकाज की जांच पड़ताल करने की सलाह दी जाएगी
सुदामा नर-वरे/11जून2019