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वर्तमान परिवेश में बेटी बचाओ गंभीर चुनौती। (लेखक -विजय कुमार जैन/ईएमएस)

26/03/2019

वर्तमान में बेटी अगर गर्भ में आ गई है तो उनको जन्म से पहले ही इस दुनिया में नहीं आने दिया जाता। बेटी का गर्भपात या भ्रूण हत्या कराने माँ बाप सक्रिय हो जाते हैं। जन्म के बाद बेटी की सुरक्षा चुनौती बन गई है।
वर्तमान में मानव अंगों की तस्करी जोर शोर से चल रही है। किसी व्यक्ति की किडनी बदलना है तो उसकी कीमत लगभग 40 लाख रुपये होती है उसमें भी डाँक्टर की शर्त होती है बदलकर जो किडनी लगाना है वह 16 से 25 वर्ष के पूर्ण स्वस्थ व्यक्ति की होना आवश्यक है। हम यह नहीं जानते मानव शरीर के विभिन्न अंग कहाँ से आते हैं। हम तो यही समझते है या हमे समझाया जाता है कि मानव शरीर के अंग मुर्दा घरों पड़ी लाशों या एक्सीडेंट में मरने बालों के होते हैं।
यह तो आम जनता को मूर्ख बनाने मानव अंग तस्करों द्वारा भ्रामक प्रचार किया जाता है। वास्तविकता कुछ और ही है।
भारत में मध्यम वर्ग के 16 से 25 वर्ष के लड़के नशा करके अपने शरीर के विभिन्न अंगों को जबानी में ही खराब कर लेते हैं।भारत में मानव अंग प्राप्त करने की सबसे उपयुक्त जगह मध्यम वर्ग की लड़कियाँ है। ये लड़कियाँ जिनकी आयु 16 से 25 वर्ष होती है वह सिगरेट, गुटखा, स्मैक, शराब का सेवन न करके अपने शरीर को पूर्ण स्वस्थ्य रखती हैं। इनके दांत, हड्डी, आंतें,चमड़ा, क्रेनियम,लीवर,किडनी, हृदय सब सही और प्रत्यारोपण के लिये उपयुक्त होते हैं।
भारत में मध्यम वर्ग की लड़कियों को प्रेम प्रसंग के जाल में फसाया जाता है।इनके दिमाग में प्रेम प्यार का कीड़ा बैठाया जाता है।हर वर्ष हमारे देश में मध्यम वर्ग की 2 से 4 लाख लड़कियाँ घर से गायव हो जाती हैं।व्यौरा यह दिया जाता है कि प्रेम जाल में
फंसकर घर से गायव हो गई। न कोई केस बनता न कोई खोजने का प्रयास करता है। गायव हुई लड़कियों का एक बाल तक नही मिलता। विचारणीय प्रश्न यह है ये लड़कियाँ कहाँ पहुंच जाती हैं। असल में पहले तो इन लड़कियों का भरपूर शारीरक शोषण किया जाता है, इसके पश्चात इन लड़कियों की हत्या कर दी जाती है, और अंग व्यापार में इनके शरीर के अंगों को बेचकर करोड़ों रुपयों की कमाई की जाती है।
जिन लड़कियों का अपहरण कर उनका शारीरक शोषण किया जाता है। उनकी हत्या मानव अंग बेचने के लिये कर दी जाती है। हत्या करके उस लड़की के मानव अंगों को बेचकर लगभग 5 करोड़ रुपये कमाये जाते है। इसीलिये लव जिहाद और मानव तस्करी पर कोई कानून बनता है न कोई बनने देता है। यह भी विचारणीय बिन्दु है कभी भी किसी बड़े नेता, उद्योग पति या व्यापारी की बेटी घर से भागती या गायव होती है, हमेशा वही लड़कियाँ गायव होती है ,
जिनके परिवार में कोई राजनैतिक या कानूनी पकड़ नही होती।
सन 2015 में उ.प्र. में 4000 लड़कियाँ गायब हुई थी, उस समय जन विरोध से बचने के लिये anti romio squad बनाया गया था, उसका नेताओं, मीडिया और कम सोच बालों ने भरपूर विरोध किया था। हम यह मान लें कि हमारी लाड़ली बहिन बेटियाँ सब जानती है अपने भविष्य को लेकर जागरूक है। परिवार जनों का पूरा सम्मान करती है वह जीवन में कोई ऐसा कार्य नहीं करेंगी जिससे परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचे। इसके वावबूद यह विचारणीय प्रश्न है आपराधिक व्यापार, अंग प्रत्यारोपण के लिये सही और असली अंग कहाँ से आते है।
हमे हमारे परिवार की बहिन बेटियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। जो बाहर हो रहा है वह हमारे परिवार परिजनों मित्रों के साथ भी कभी भी हो सकता है।
26/03/2019