लेख

राज्यसभा में बहुमत पर बेचैनी (लेखक-अजित वर्मा)

10/07/2019

भारतीय जनता पार्टी अपने महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए राज्यसभा में बहुमत हासिल करने के मिशन पर लगतार तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसा पहली बार हो रहा है जब भाजपा दूसरे दलों के राज्यसभा सदस्यों को अपने पाले में लाने के अभियान में जुट गयी है। भाजपा कई छोटे-छोटे दलों के राज्यसभा सदस्यों को तोड़ने में ज्यादा जोर लगा रही है ताकि दल बदल की कार्यवाही से बचा जा सके।
लोकसभा चुनाव के बाद तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के चार और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के एकमात्र राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इस तरह संसद के ऊपरी सदन में पार्टी के सांसदों की संख्या बढ़कर 76 हो गई है।
राज्यसभा में वर्तमान में सदस्यों की कुल संख्या 239 है जिसमें 76 सांसदों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बाद कांग्रेस का नंबर आता है, जिसके पास कुल 48 सदस्य हैं। तीसरे नंबर पर तीन पार्टियां- समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और अन्नाद्रमुक हैं जिनके पास 13-13 सांसद हैं।
भाजपा आश्वस्त है कि जिन राज्यों में इस साल के अंत में या अगले साल चुनाव होने हैं, वहां वह विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करेगी और राज्यसभा में उसकी अंक तालिका में और सुधार होगा। इस तरह अगले साल नवंबर में उसे अपने बलबूते राज्यसभा में पूर्ण बहुमत मिल जाने की पूरी उम्मीद है।
राज्यसभा में बहुमत को लेकर भाजपा इतना इंतजार करने के मूड में नहीं दिखाई देती। पिछली लोकसभा के जिन अहम विधेयकों को राज्यसभा में विपक्ष ने लटका दिया था, भाजपा अब उन्हें जल्द से जल्द पास कराने की जुगत में लग गई है। इस समय भाजपा की नजरें एक, दो या तीन-चार सांसदों वाली पार्टियों पर लग गई है।
राज्यसभा में वर्तमान में 8 राजनीतिक दल ऐसे हैं जिनके सांसदों की संख्या 1-1 है। भाजपा के इस एक्शन प्लान की भनक लगने से छोटे दलों में हाहाकार मच गया है। ये पार्टियां अपने सांसदों को अपने साथ बनाए रखने की कोशिशों में जुट गई हैं। ऐसी खबरें हैं कि तीन राज्यसभा सांसदों वाली एक नई पार्टी के दो सांसद जल्दी ही भाजपा आने वाले हैं।
हाल ही में तेदेपा के छह सांसदों में से चार ने भाजपा का दामन थाम लिया तो उन पर दल-बदल कानून लागू नहीं हो पाया। इसी तरह जब इनेलो के एकमात्र राज्यसभा सांसद भाजपा में आए तो यह कानून उन्हें भी प्रभावित नहीं कर पाया।
भाजपा को समय-समय पर मुद्दों के आधार पर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के 2 और बीजू जनता दल के 7 सांसदों का समर्थन मिलता रहा है।
एनडीए के कुल सांसदों की बात करें तो राज्यसभा में वर्तमान में यह आंकड़ा 111 का हो गया है और वर्तमान में दस स्थान रिक्त हैं। राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों के बाद 5 जुलाई को सदन की दलीय स्थिति में परिवर्तन होगा और एनडीए के सांसदों की संख्या 115 हो जाएगी। 245 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 123 सदस्य चाहिए। इस तरह एनडीए लगातार बहुमत के करीब पहुंचता जा रहा है। भाजपा के लिए मुश्किल यह है कि तीन तलाक और नागरिकता संशोधन विधेयक ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर एनडीए में शामिल जेडीयू को आपत्ति है, इसलिए भाजपा ने ज्यादा से ज्यादा राज्यसभा सदस्यों को अपने साथ जोड़ने का अभियान चला रखा है।
ईएमएस/10 जुलाई19