लेख

विपक्षियों की एकजुटता बनी है कांग्रेस के लिए चुनौती (लेखक-अजित वर्मा/ईएमएस)

11/09/2019

लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में विपक्षी दलों के बुरी तरह से हुए सफाये के बाद विपक्षी दलों में अभी भी निराशा और हताशा का माहौल बना हुआ है। सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस ने बाकी विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिशें शुरू जरूर की हैं लेकिन इन कोशिशों को अभी वैसी कामयाबी नहीं मिली है जैसी कि मिलना चाहिये। फिर भी कोशिशों की शुरुआत तो कांग्रेस कर चुकी है।
जम्मू-कश्मीर में धारा 370 को हटाये जाने को लेकर कांग्रेस विपक्षी दलों को एकजुट करने में नाकाम साबित हुयी है। इस मामले में विपक्ष बंटा हुआ नजर आया। फिर भी कश्मीर के मामले में बचे-कुचे विपक्ष को गोलबंद करने में कांग्रेस सक्रिय रही है। कुछ विपक्षी नेताओं को राहुलगांधी अपने साथ कश्मीर ले जरूर गये लेकिन उनको खाली हाथ लौटना पड़ा। बसपा जैसे कई विपक्षी दल कश्मीर के मामले में सावधानी बरत रहे हैं और वे राजनैतिक नुकसान से बच रहे हैं।
एक और बड़ा मुद्दा केन्द्र सरकार की जांच एजेंसियों द्वारा विपक्षी दलों के नेताओं के खिलाफ हो रही कार्यवाही है। कांग्रेस के साथ ही विपक्ष के कई नेता जांच एजेंसियों की चपेट में हैं। इसीलिये अब कांग्रेस ने केंद्र की भाजपा नीत सरकार द्वारा जांच एजंसियों के कथित दुरुपयोग के मामले में विपक्षी दलों को गोलबंद करने की कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत विपक्षी दल देशभर में धरना-प्रदर्शन कर जांच एजंसियों की मनमानियों और उनके बेजा इस्तेमाल के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे।
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेता जम्मू-कश्मीर में हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर चुके हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा के महासचिव डी राजा, सपा नेता रामगोपाल यादव, लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा, और तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। सभी ने मांग की कि जम्मू-कश्मीर में नजरबंद नेताओं की नजरबंदी हटाई जाए और वहां दूरसंचार सेवाएं बहाल की जाएं।
कांग्रेस सांसद कीर्ति चिदंबरम भी विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उनके पिता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी.िचदंबरम को आइएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआइ ने गिरफ्तार किया है। पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती सहित कई नेता नजरबंद हैं। जम्मू-कश्मीर मामले में प्रदर्शन करने वाले विपक्षी दलों के नेताओं के बीच इस बात पर भी सहमति बनी है कि केन्द्र सरकार द्वारा कथित तौर पर जांच एजंसियों के दुरुपयोग के खिलाफ भी आवाज बुलंद की जाए। इसके तहत देश के प्रत्येक राज्य में धरना और प्रदर्शनों का आयोजन कर आम लोगों को यह बताया जाएगा कि केन्द्र की हुकूमत किस प्रकार सत्ता का दुरुपयोग कर रही है। अब यह देखना होगा कि जांच एजेंसियें के मामले में कांग्रेस के साथ कितने विपक्षी दल साथ आते हैं इससे भविष्य में विपक्षियों की कैसी एकता होगी इसका भी अंदाजा लग जायेगा।
ईएमएस/11 सितम्ब्रर19