लेख

ज्वलंत मुद्दा - चीन सीमा का सच उजागर करते राहुल गांधी ! (लेखक-डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट / ईएमएस)

01/08/2020

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर कहा कि चीनी हमारे इलाके में घुस आए हैं।उनका हमारे इलाके में घुसना उन्हें परेशान करता है और इसे लेकर उनका खून खौल रहा है। राहुल गांधी ने सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह सच बोलते रहेंगे, भले ही इसकी वजह से उनका राजनीतिक कैरियर बर्बाद हो जाए। एक वीडियो संदेश जारी करते हुए राहुल गांधी ने यह बात कहीं। इस वीडियो में उनसे सवाल किया जाता है कि उन लोगों के बारे में आपका क्या ख्याल है ,जो कहते हैं कि प्रधानमंत्री से चीन पर आपके सवाल, भारत को कमजोर कर रहे हैं? राहुल गांधी जवाब में कहते हैं कि उनकी पहली प्राथमिकता यह देश और देश की जनता है। राहुल ने कहा, ''यह बात एकदम साफ है कि चीनी हमारे इलाके में घुस आए हैं। यह बात मुझे परेशान करती है। इससे मेरा खून खौलने लगता है कि कैसे एक दूसरा देश हमारे इलाके में घुस आया?''
राहुल आगे कहते हैं,''कुछ लोग एक राजनीतिज्ञ के तौर पर चाहते हैं कि मैं चुप रहूं जबकि मैं निश्चित रूप से जान गया हूं, मैंने उपग्रह की तस्वीरें देखी हैं, मैंने पूर्व सैन्यकर्मियों से बात की है।
राहुल गांधी ने सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा, कि ''मैं सोचता हूं, वे लोग जो चीनियों के हमारे देश में घुसने के बारे में झूठ बोल रहे हैं, वे ही लोग राष्ट्रवादी नहीं हैं। मेरे ख्याल में, जो लोग झूठ बोल रहे हैं और कह रहे हैं कि चीनी भारत में नहीं घुसे हैं। वे ऐसे लोग हैं, जो देशभक्त नहीं हैं। इसलिए मैं स्पष्ट कह रहा हूँ,मैं चिंता नहीं करता कि यदि इसका राजनीतिक मूल्य भी चुकाना पड़े, मैं चिंता नहीं करता। चाहे मेरा राजनीतिक करियर पूरी तरह खत्म हो जाए। लेकिन मैं केवल सच बोलूंगा।
दरअसल राहुल गांधी की कार्यशैली, बोली, भाषण, मुस्कुराहट आदि बहुत कुछ कह रही है। यहां तक कि व्यवहार में भी काफी कुछ बदलाव है। जो लोग उन्हें करीब से देख रहे हैं,वे इस बदलाव से थोड़े हतप्रभ भी हैं। उनमे वे एक नए राहुल गांधी को देख रहे हैं।
राहुल गांधी का नया अवतार उनकी ब्रांडिंग में लगे इमेजमेकर्स और रणनीतिकारों की ओर से किए गए बदलाव का नतीजा कहा जा सकता है। बीते कुछ समय से दिख रहा है कि राहुल गांधी लगातार सक्रिय हैं। सड़क, संसद और सोशल मीडिया पर भी लगातार बने हुए हैं। उनमें अमूलचूल बदलाव दिख रहा है। वे पार्टी संबंधी गतिविधियों में लगातार शिरकत कर रहे हैं और लोगों से भी मिलजुल रहे हैं। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी अब सियासत में रमने लगे हैं।
या फिर कहे उन्हें सियासत रास आने लगी है और वे सियासत से प्यार करने लगे हैं। उनमें सीखने की लालसा है और तेजी से उसके लिए प्रयास करते दिख भी रहे हैं।जो कांग्रेस के लिए संजीवनी की तरह होगी।

कांगेस युवराज राहुल गांधी की उनके विरोधी पक्ष द्वारा छवि खराब करने की लगातार कोशिशो के बीच उनके बयान विपक्ष के सन्नाटे को तोड़ने का काम करते है।उन्होंने चापलूस नेताओं और उन्हें गुमराह करने की कोशिश करने वालो से तंग आकर स्वयं ही कांग्रेस के अध्यक्ष को छोड़ दिया था।जिसकारण कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी कार्यवाहक रूप से सोनिया गांधी को ही संभालनी पड़ी।लेकिन अब फिर राहुल गांधी को ही पुनः कमान सोंपने की मांग कांग्रेस के कुछ लोग उठाने लगे है।
वह भी ऐसे समय पर जब अब बिहार समेत कई राज्यो में विधानसभा चुनाव आगाज हो रहा है जिसके लिए भाजपा ने तो वर्चुअल रैलियां तक शुरू कर दी है। प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह समेत समूची भाजपा स्वयं सत्ता में होने के बावजूद कमियों का ठीकरा कांग्रेस पर ही फोड़ रहे है।उन्हें कांग्रेस के सत्तर साल तो नजर आते है परन्तु अपने अभी तक के पहले व दूसरे कार्यकाल पर वे चर्चा तक नही करते।
वे न सिर्फ राहुल गांधी पर हमलावर है बल्कि उनका तरह तरह से उपहास उड़ाने व उनपर कीचड़ उछालने से भी परहेज नही कर रहे है।हालांकि विपरीत राजनीतिक हालातो के बावजूद कांग्रेस ने राहुल गांधी को लेकर हमेशा एक जुटता दिखाई । कांग्रेस की संगठन स्तर पर गांधी परिवार के प्रति आस्था व विश्वास के कारण ही राहुल गांधी वास्तव में टिक पा रहे है।भाजपा भले ही इसे गांधी परिवार की कांग्रेस कहे लेकिन यह भी सच है कि गांधी परिवार ही सर्व मान्य हो सकता है,अन्य कोई नही।वही भाजपा के अंदर भी पार्टी कही गायब सी हो गई है और उसकी जगह मोदी की भाजपा ने ले ली है।जब से मोदी सत्ता मे आये है,तब से भाजपा के पुराने व कद्दावर नेताओ को किनारे कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या फिर अमित शाह की मर्जी से संगठन व सरकार मे जिम्मेदारी मिलने लगी है। अनुशासन का डंडा कांग्रेस में भी चलता है। पिछले दिनों कांग्रेस नेता मणि शंकर अय्यर द्वारा अमर्यादित बयान देने पर किया गया उनका निलम्बन कांग्रेस को बड़ा बनाने के लिए काफी है।
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने नरेन्द्र मोदी को नीच कहा था, निसंदेह कांग्रेस नेता अय्यर का यह बयान बेहद आपत्तिजनक था,क्योंकि प्रधानमंत्री पद की एक गरिमा होती है।जिसके लिए राहुल गांधी आगे आये और अय्यर के खिलाफ कार्यवाही की।
जबकि इस तरह की बातों पर भाजपा में कोई कार्यवाही नही होती बल्कि शाबाशी मिलती है ।
और मोदी जी भी कई बार गरिमा की सीमा लांघ जाते है ,जो उचित नही है। विदेशो में भी वे भारत और विपक्ष का मजाक बनाने से नही चुके ।
मणिशंकर प्रधानमंत्री की बाबत दिए अपने आपत्तिजनक बयान पर 6 बार माफी मांगी और कांग्रेस ने भी उनको पार्टी से निलंबित किया था, जो कि किसी भी राजनैतिक दल में सबसे बड़ी कार्यवाही होती है ।
लेकिन मोदी जी ने अय्यर की माफी को भूल कर उनके अमर्यादित बयान को चुनावी मुद्दा बनाते हुए एक सभा में कहा कि मुझे नीची जाति वाला कहा गया, 'मुझे गंदी नाली का कीड़ा'कहा गया, अपने बारे में ये शब्द दोहराना देश को भी अच्छा नही लगा था।
आखिर एक प्रधानमंत्री जैसे गरिमामयी पद पर बैठे व्यक्ति को सिर्फ वोटों की खातिर इस तरह का सहारा लेना निश्चित ही अच्छा नही है।
जबकि भाजपा शुरू से ही देश के प्रथम प्रधानमंत्री व कांग्रेस सत्तारूढ़ प्रधानमंत्रियों के बारे मै अपशब्द कहती आई है ।नेहरू ज से लेकर मनमोहन सिंह तक इनका इतिहास यही है
अगर बीजेपी में हिम्मत है तो वह अपने उन बत्तमीज पार्टी नेताओ को बाहर करे जो बार बार मर्यादा को तार तार करते रहे है। कांग्रेस का अपने नेताओ पर अनुशासनहीनता के मामले मे कार्यवाही करना जानती है।भाजपा और उसके नेताओ के द्वारा राहुल गांधी की छवि प्रभावित करने के लिए चलाये गए कैंपेंन के बावजूद राहुल गांधी की छवि एक गम्भीर एवम् देश व संगठन के प्रति जिम्मेदार नेता के रूप मे उभरकर सामने आई है जो कांग्रेस की मजबूती का आधार बन सकती है।
01अगस्त/ईएमएस