क्षेत्रीय

“मिलिये ‘गूगल गर्ल’ शंजन थम्मा से”

07/10/2019

असाधरण प्रतिभा की धनी है उज्जैन की यह बालिका
उम्र महज 3 वर्ष, लेकिन अपनी उम्र के बच्चों से है बहुत आगे
उज्जैन (ईएमएस)। शहर के परवाना नगर में अपनी मां और नाना-नानी के साथ रहने वाली नन्हीं बालिका शंजन थम्मा देखने में बिलकुल अपनी उम्र के साधारण बच्चों की तरह है, लेकिन ज़रा ठहरिये क्योंकि कभी-कभी जो दिखाई देता है, वो होता नहीं। मात्र तीन साल की यह बालिका अपनी असाधारण प्रतिभा के बदौलत न केवल हमउम्र बच्चों से आगे है, बल्कि बेहद प्रसिद्ध भी हो रही है। हाल ही में प्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ ने भी असाधरण प्रतिभा की धनी शंजन थम्मा को ट्विटर पर ट्विट कर बधाई दी थी।
शंजन थम्मा का नाम ‘यंगेस्ट एंबीडेक्स्ट्रस राइटर’ के रूप में वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज हुआ है, जो कि न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे उज्जैन के साथ-साथ पूरे प्रदेश के लिये गौरव की बात है। शंजन थम्मा अपने दोनों हाथों से एकसाथ लिख सकती है। अंग्रेजी की वर्णमाला के साथ-साथ गणित के एक से पचास तक के अंक जब वह दोनों हाथों से एकसाथ लिखना शुरू करती है तो देखने वाले दंग रह जाते हैं।
शंजन थम्मा के नाना रमेशचन्द्र शर्मा और नानी श्रीमती प्रमिला शर्मा बताते हैं कि उनकी बेटी और शंजन थम्मा की मां श्रीमती मानसी श्रीधर का विवाह आन्ध्र प्रदेश में हुआ। दक्षिण भारत की मान्यता अनुसार जन्म के समय कुंडली में आये स्थानीय भाषा के अक्षर पर नाम रखने की प्रथा है। शंजन थम्मा का नाम करण भी वहीं पर हुआ। बालिका के पिता भारतीय वायुसेना में अधिकारी हैं। उनकी पदस्थापना दूर-दराज में होने पर शंजन थम्मा और उनकी मां मानसी यहां उज्जैन में रहते हैं।
शंजन थम्मा एक समय पर अपने दोनों हाथों से लिख सकती है, अन्य विषयों में भी उसकी ग्रहण करने की क्षमता बहुत अधिक है। शंजन थम्मा का शुरू से ही पढ़ाई में भी बहुत लगाव रहा है। उससे दुनिया के किसी भी देश की राजधानी पूछें तो वह झट से बिलकुल गूगल की तरह जवाब देती है। इसीलिये शंजन थम्मा को उसके पिता प्यार से गूगल गर्ल भी कहते हैं और अब वह इसी नाम से प्रसिद्ध भी हो रही है।
श्रीमती श्रीधर बताती हैं कि जब शंजन थम्मा एक साल की थी, तब से ही दुनिया के देशों की राजधानियों का नाम लेने लगी थी। पहले तो उन्होंने इस पर विशेष ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में समय बितने पर पता चला कि उनकी बालिका असाधारण प्रतिभा की धनी है। वे बताती हैं कि शंजन थम्मा हिन्दी के अलावा अंग्रेजी, तेलुगु, रशियन और फ्रेंच भाषा के शब्द भी समझ लेती है। सौर मण्डल और अंतरिक्ष विज्ञान में भी विशेष रूचि रखती है शंजन थम्मा। हाल ही में मिशन चन्द्रयान के दौरान उसकी लेंडिंग का सीधा प्रसारण जब देर रात्रि 2 बजे टीवी पर दिखाया जा रहा था, तब परिवार में सभी लोग सो रहे थे और केवल शंजन थम्मा जागते हुए पूरा प्रसारण देखती रही।
श्रीमती श्रीधर बताती हैं कि शंजन थम्मा के आईक्यू लेवल के परीक्षण के लिये उन्होंने हाल ही में अप्लाई किया है। शंजन थम्मा की पूजा-पाठ और धर्मग्रंथों में भी विशेष रूचि है। भगवान गणेश और शिरड़ी के सांईबाबा की आरती उसे अक्षरश: याद है। शंजन थम्मा भारत को विश्व का सबसे महान और प्यारा देश बड़े गर्व से कहती है। गणित में टू डायमेंशन और थ्री डायमेंशन चित्रों में भी बड़ी आसानी से वह फर्क कर लेती है। इसके अलावा राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम’ का भी बिलकुल सही उच्चारण के साथ गायन करती है यह बच्ची, जिसे लगातार सुनते रहने का मन करता है।
श्रीमती मानसी श्रीधर कहती हैं कि हाल ही में जब प्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ ने ट्टिवट कर उन्हें शुभकामनाएं दी तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। वे ट्टिवट देखकर भावुक हो गई थी और उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने मुख्यमंत्री कमल नाथ का हृदय से आभार व्यक्त किया। वहीं कलेक्टर शशांक मिश्र को जब शंजन थम्मा के बारे में पता चला तो उन्होंने शंजन थम्मा और उनकी मां श्रीमती मानसी श्रीधर से कलेक्टर कार्यालय में सौजन्य भेंट की और शंजन थम्मा के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
प्रवीण/07/10/2019