अंतरराष्ट्रीय

बांग्लादेश: पहले हिंदू मुख्य न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार सिन्हा के खिलाफ गबन का आरोप, गिरफ्तारी वॉरंट जारी

06/01/2020

ढाका (ईएमएस)। बांग्लादेश के पहले हिंदू मुख्य न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार सिन्हा की मुश्किले बढ़ सकती हैं उनके खिलाफ बांग्लादेश सरकार ने गबन के आरोपों को लेकर गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया गया है। अदालत के अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। इन दिनों अमेरिका में रह रहे सिन्हा (68) को भ्रष्टाचाररोधी आयोग (एसीसी) ने अपने आरोपपत्र में भगोड़ा घोषित किया है। ढाका के सीनियर स्पेशल जज कोर्ट के न्यायाधीश के.एम. एमरूल कायेश ने सिन्हा और 10 अन्य के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर संज्ञान लिया। सरकारी वकील तापस कुमार पाल ने संवाददाताओं से कहा, ‘न्यायाधीश ने करीब चार करोड़ टका (4,71,993 डॉलर) का 2016 में गबन करने और धनशोधन करने के आरोप में उनके (सिन्हा के) साथ 10 अन्य की गिरफ्तारी का आदेश दिया है। शेष आरोपी फार्मर्स बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक सहित पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हैं।' पाल ने कहा कि एसीसी ने अपने आरोपपत्र में सभी 11 आरोपियों को भगोड़ा घोषित किया है। इसने आरोप लगाया है कि सिन्हा और 10 अन्य ने फार्मर्स बैंक से चार करोड़ टका का गबन किया। इस बैंक का नाम बाद में पद्मा बैंक लिमिटेड कर दिया गया।
सिन्हा जनवरी 2015 से नवंबर 2017 तक बांग्लोदश के 21 वें मुख्य न्यायाधीश रहे। समझा जाता है कि उन्होंने अमेरिका में शरण मांगी है। सरकार के साथ विवाद के बीच पद छोड़ने के लिए मजबूर किए जाने के बाद सिन्हा ने हाल ही में विमोचित अपनी आत्मकथा को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा में आ गए। सिन्हा ने अपनी आत्मकथा ‘अ ब्रोकेन ड्रीम: रूल आफ लॉ, ह्यूमन राइट्स एंड डेमोक्रसी’ में कहा है कि उन्हें धमकियों के बाद 2017 में इस्तीफा देने के बाद मजबूर किया गया। इस पर प्रधानमंत्री शेख हसीना ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और आरोप लगाया था कि कुछ सरकार विरोधी अखबार उनका समर्थन कर रहे हैं। वॉशिंगटन में पुस्तक विमोचन के बाद एक साक्षात्कार में सिन्हा ने भारत से बांग्लादेश में कानून का शासन एवं लोकतंत्र का समर्थन करने का अनुरोध किया था। उन्होंने मौजूदा अवामी लीग सरकार को निरंकुश करार दिया। अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से बांग्लादेश के प्रथम मुख्य न्यायाधीश सिन्हा ने आरोप लगाया है कि उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया क्योंकि उन्होंने बांग्लादेश के मौजूदा अलोकतांत्रिक और निरंकुश शासन का विरोध किया था।
विपिन/ ईएमएस/ 06 जनवरी 2020