खेल

सीतामढ़ी में नाई की दुकान चला कर गुजारा कर रहा है राष्ट्रीय स्तर का खो-खो खिलाड़ी

16/09/2020


सीतामढ़ी (ईएमएस)। बिहार सरकार खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने को लेकर लाख दावे करे, लेकिन सच्चाई दावे से कोसों पीछे है। इसकी एक बानगी सीतामढ़ी का कमलेश कुमार है। कमलेश खेल के क्षेत्र में सूबे का नाम रोशन किया, लेकिन आज उसकी जिन्दगी में सिवाय अंधेरे के कुछ नहीं है। कमलेश आज हजामत की दुकान चलाकर घर चलाने को मजबूर है। सीतामढ़ी के परिहार प्रखंड के सुरगहिया गांव निवासी कमलेश को आज पूरे सिस्टम से शिकायत है। उसके मुताबिक उसने अपनी जिन्दगी खेल के नाम कर दी थी, लेकिन बदले में उसे सिर्फ तंगहाली मिली है। कमलेश खो-खो का उम्दा खिलाड़ी है। आठ बार वह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में बिहार का नेतृत्व कर चुका है। असम, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, कर्नाटक, दिल्ली, महाराष्ट्र समेत कई शहरों में उसने बड़े प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, लेकिन बदले में उसे हजामत की दुकान चलाकर जिंदगी चलाने की मजबूरी मिली।
कमलेश का कहना है कि आज तक उसे सरकार या प्रशासन से कभी कोई मदद नहीं मिली। यहां तक कि वह चंदे के पैसे से बाहर खेलने गया। हालांकि इस उदासीन व्यवस्था से कमलेश का खेल के प्रति प्रेम और जज्बा कम नहीं हुआ है। उसे उम्मीद है कि कभी तो सिस्टम जगेगा और उसकी प्रतिभा की कद्र की जाएगी। कमलेश दुकान चलाने के साथ-साथ अब अपने गांव के बच्चों को खो-खो का प्रशिक्षण दे रहा है। ग्रामीण रामचन्द्र साह का कहना है कि कमलेश के मन में खेल को लेकर एक अलग सा जुनून है। वह गांव के बच्चों को प्रशिक्षण देकर अपने अधूरे सपने को पूरा करना चाहता है।
अनिरुद्ध/ईएमएस 16 सितम्बर 2020