लेख

(विचार-मंथन) पीओके पर नजर (लेखक-सिद्धार्थ शंकर / ईएमएस)

04/11/2019


देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के मौके पर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का अब नया नक्शा भी जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही भारत का नया राजनीतिक नक्शा भी सर्वेअर जनरल ऑफ इंडिया की ओर से जारी हुआ है। इस नक्शे के जरिए भारत ने पड़ोसी मुल्क पाक और चीन को एक कड़ा संदेश देते हुए पीओके के मीरपुर और मुजफ्फराबाद को भारत के नक्शे में विशेष तौर पर इंगित किया है। इससे पहले के भारत के नक्शे में सीमा तो यही थी, लेकिन मीरपुर और मुजफ्फराबाद का स्पष्ट तौर पर जिक्र नहीं होता था। जम्मू-कश्मीर में अब कुल 22 जिले बनाए गए हैं, जिनमें मीरपुर और मुजफ्फराबाद भी शामिल हैं। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में दो जिले बनाए गए करगिल और लेह। गिलगित-बाल्टिस्तान के पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र को नक्शे में लेह का जिला दर्शाया गया है। हालांकि इसका जिक्र नहीं है। लेह जिले में फिलहाल पाकिस्तान के कब्जे में मौजूद गिलगित, गिलगित वजारत, चिल्हास, ट्राइबल टेरिटरी और पाकिस्तान की ओर से चीन को दिए गए अक्साई चिन को शामिल किया गया है। हालांकि लेह में शामिल गिलगित, गिलगित वजारत व अन्य क्षेत्रों को राजनीतिक नक्शे में अलग से लिखा नहीं गया है। जम्मू-कश्मीर राज्य में 1947 में कुल 14 जिले थे, जिनमें कठुआ, जम्मू, उधमपुर, रियासी, अनंतनाग, बारामूला, पुंछ, मीरपुर, मुजफ्फराबाद, लेह और लद्दाख, गिलगित, गिलगित वजारत, चिल्हास और ट्राइबल टेरिटरी शामिल थे। हालांकि 2019 तक इनकी संख्या बढ़कर 28 हो गई थी। अब नए केंद्र शासित प्रदेश बने जम्मू-कश्मीर में कठुआ, जम्मू, सांबा, उधमपुर, डोडा, किश्तवाड़, राजौरी, रियासी, रामबन, पुंछ, कुलगाम, शोपियां, श्रीनगर, अनंतनाग बडगान, पुलवामा, गांदरबल, बांदीपोरा, बारामूला, कुपवाड़ा, मीरपुर और मुजफ्फराबाद शामिल हैं। लद्दाख में सरकार ने दो जिलों का गठिन किया है, लेह और करगिल। इनमें से लेह में पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान को शामिल किया गया है। लेह में गिलगित, गिलगित-वजारत, चिल्हास, ट्राइबल टेरिटरी को शामिल किया गया है।
इस नक्शे के बाद अब तक सीमा पार से प्रतिक्रिया नहीं आई है, मगर देश में तूफान खड़ा हो गया है। नक्शे के सामने आने के बाद हर कोई सरकार की तरफ सवालिया निशान से पूछ रहा है कि अब उसका इरादा क्या है? पीओके को लेकर जिस तरह से मोदी सरकार और सेना की तरफ से बयान आया है, उसके बाद इस नक्शे ने लोगों को उद्वेलित कर दिया है। बता दें कि धारा-370 हटाए जाने के बाद कई लोगों ने पीओके भी हासिल करने की मांग उठाई थी। तब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि पाक के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) भारत का हिस्सा है और उम्मीद करते हैं कि यह एक दिन भारत के भौतिक अधिकार क्षेत्र में होगा। अब पीओके को भारत के नक्शे में शामिल किया जाना जयश्ंाकर के इसी बयान को आगे बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से लेकर सेना प्रमुख बिपिन रावत भी पीओके को लेकर रुख स्पष्ट कर चुके हैं।
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर को लेकर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के बयान के बाद सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने बड़ी बात कही थी। उन्होंने कहा था कि ऐसे मामलों में फैसला सरकार को करना होता है। देश की संस्थाएं सरकार के आदेशों के मुताबिक काम करती हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि सेना किसी भी आदेश और अभियान के लिए हमेशा तैयार है। दरअसल, जितेंद्र सिंह ने बयान दिया था कि अगला एजेंडा पीओके को फिर से हासिल करना है। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिनों की सबसे बड़ी उपलब्धियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा था कि हमारा अगला एजेंडा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना है। इस तरह के बयान और अब जारी नक्शा बता रहा है कि सरकार के मन में क्या चल रहा है।
पीओके को भारत के नक्शे में शामिल करने का मंतव्य जो भी हो, मगर थोड़ी देर के लिए मान लिया जाए कि पीओके जल्द भारत का हिस्सा होगा, तो सबसे बड़ा फायदा आतंकवाद के सफाये का होगा। सभी बड़े आतंकी संगठन पीओके में ही चल रहे हैं। भारत कई बार पाक को इन संगठनों की जानकारी दे चुका है। भारत की सर्जिकल स्ट्राइक भी पीओके में ही की गई थी। मगर पाक ने अब तक कोई संजीदगी नहीं दिखाई। इसलिए भारत को आतंकवाद का जड़ से इलाज करने के लिए बड़ा कदम उठाना ही होगा। यह कदम अगर पाकिस्तान से पीओके छीनना है तो यही सही।
04नवंबर/ईएमएस