क्षेत्रीय

(मुरैना) चरमराती यातायात व्यवस्था से जूझता शहर

15/05/2019

- निगम कर्मचारी और यातयात पुलिस कर्मी करते हैं अनदेखी
मुरैना (ईएमएस)। शहर की यातायात व्यवस्था पर यूं तो सदैव प्रश्नचिन्ह लगता रहा है, लेकिन इस बार सीवर के कारण खुदी पडी सडकें धूल धूसित शहर में दुपहिया और चार पहिया वाहन हर घंटे में फंसे नजर आते हैं। यातायात पुलिस कर्मी सिर्फ अपनी औपचारिक डयूटी निभाकर खडे रहते हैं, वाहन चालक भी थोडे ही समय में अपनी दूरी तय करने के लिए आगे बढने का प्रयास करते हैं और जाम की स्थिति निर्मित हो जाती है। शहर में स्टेशन रोड पर से देखा जाये तो महादेव नाके से लेकर ओव्हर ब्रिज तक ई-रिक्शा चालकों की संख्या बढती जा रही है। साठ फुट का रोड भी इन्हें कम पडने लगा है। एक साथ सारे रिक्शे ट्राफिक का उल्लंघन करते हैं, बिना किसी आवाज के इन रिक्शा चालकों का एक दम से निकल जाना लोगों को चौका देता है। ओव्हर ब्रिज के बाद अस्पताल, जेल रोड पर जाम की स्थिति बनती है, लोगों को सडक क्रॉस करना मुश्किल हो जाता है। पुराने बस स्टेण्ड के चौराहे पर चारो दिशाओं के लिए रोड जाता है जहां लोगों का निकलना दूभर हो जाता है, ठीक इसी तरह कोर्ट तिराहे पर समस्या बनी हुई। इतना ही नहीं शहर के एक मार्ग ही नहीं नैनागढ रोड, वनखण्डी रोड, संजय कॉलोनी सडकों पर भी हर दो घंटे में जाम लगता है। पुलिस यातायात व्यवस्था के सुधार हेतु कारण नहीं तलाशना चाहती है। फुटपाथ पर सडकों को घेर कर बैठे फुटपाथी दुकानदार अतिक्रमण किए हुए हैं इस कारण यातायात व्यवस्था हमेशा बाधक होती है। ठीक इसी तरह नैनागढ रोड पर व्यवस्थाएं बिगडी हुई हैं। निगम और यातायात पुलिस मिलकर यदि बाजार के अतिक्रमण पर विचार किया जाये तो शायद यातायात व्यवस्था में सुधार हो सकता है।

-एबी रोड पर हर घंटे जाम
सामने कंट्रोल रूम और रोड पर थाना सिविल लाइन और रोड पर ही यातायात पुलिस थाना निर्मित होने के बाद भी एबी रोड जाम से लवरेज रहता है। जल्दी में किसी मरीज को अस्पताल ले जाना हो तो बैरियर क्रॉस करने के लिए घंटों मशक्कत करनी पडती है। माधवराव सिंधिया नगर से लेकर केएस कोठी के आगे तक वाहन चींटी की तरह रेंगते हैं बल्कि घंटों खडे रहते हैं। ये बात सही है कि फ्लाई ओव्हर के निर्माण के कारण कुछ व्यवस्थाएं बिगडी हैं लेकिन साईड रोडों का निर्माण न करना, अनुबंध से बाहर काम करना और प्रशासन की अनदेखी भी एबी रोड के जाम का कारण है। इसके अलावा एबी रोड पर भी ट्रक और बस आदि वाहनों के दुकानदार और फुटपाथी, ठेले खौम्चे वाले सडक घेरे हुए हैं, इस कारण प्रतिरोज जाम लगता है। जाम के कारण मुरैना की व्यवस्थाओं का संदेश अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चलने वाले वाहन भी लेकर जाते हैं लेकिन हमारे प्रशासनिक अधिकारियो को इसका कोई सरोकार नहीं है।

-निगम और पुलिस कर्मी चाहे तो सुधर सकती है व्यवस्थाएं
निगम और यातायात पुलिस कर्मी अगर ठीक से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें और लोगों को समझाने का प्रयास करें, उनको वैकल्पिक व्यवस्थाएं दें तो शायद शहर को यातायात अव्यवस्था से निजात मिल सकती है। निगम कुंभकरणीय नींद में सो रहा है और यातायात पुलिस कर्मी अपनी जुगाड के पीछे व्यवस्थाओं को पलीता लगा रहे हैं। ई-रिक्शा हो या ऑटो रिक्शा, फुटपाथी हो या ठेले खौम्चे वाले उनकी जुगाड बननी चाहिए फिर वो चाहे बीच सडक पर सामान रख ले उनको कोई रोकने वाला नहीं है। इसके पीछे का रहस्य वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को भी पता है लेकिन उपचार नहीं किया जाता। इसलिए शहर और एबी रोड अव्यवस्थाओं के अंधकार में डूबता जा रहा है।
प्रवीण/15/05/2019