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(विचार मंथन) तिलमिला गया पाक (लेखक/ईएमएस-सिद्धार्थ शंकर)

05/07/2022

जम्मू-कश्मीर में जी-20 शिखर सम्मेलन के आयोजन को लेकर पाकिस्तान तिलमिला गया है। पाकिस्तान ने कहा है कि वह जम्मू-कश्मीर में जी-20 देशों की बैठक आयोजित करने के भारत के प्रस्ताव को खारिज करता है। साथ ही उम्मीद करता है कि समूह के सदस्य देश कानून और न्याय की अनिवार्यता से पूरी तरह परिचित होंगे और वे इस प्रस्ताव का मिलकर विरोध करेंगे। जी-20 देशों का प्रभावशाली समूह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है। बता दें कि जम्मू और कश्मीर जी-20 की 2023 बैठकों की मेजबानी करेगा। संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा वापस लेने और अगस्त 2019 में तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद जम्मू-कश्मीर में आयोजित होने वाला यह पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन होगा। अपनी पुरानी घिसी-पिटी बातों को दोहराते उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है। काफी लंबे समय से यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे में बना हुआ है। गौरतलब है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार मुंह की खाने के बाद भी जम्मू-कश्मीर का राग अलापना नहीं छोड़ रहा है। जबकि, भारत स्पष्ट कर चुका है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा। 5 अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को रद करने के भारत द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था। भारत के फैसले पर पाकिस्तान से कड़ी प्रतिक्रिया हुई। जिसने राजनयिक संबंधों को लगभग तोड़ दिया था। यहां तक कि भारतीय दूत को निष्कासित कर दिया। पाकिस्तान ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार भी रोक दिया। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के प्रभावशाली समूह जी-20 की बैठक अगले साल जम्मू-कश्मीर में करवाकर केंद्र सरकार पूरी दुनिया खासकर पड़ोसी मुल्क को संदेश देना चाहती है। कश्मीर मुद्दे के बावजूद जम्मू-कश्मीर में सम्मेलन कर पाकिस्तान और चीन के गठजोड़ को भी संदेश देना उद्देश्य है। इतना ही नहीं भारत अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में धरातल पर आए बदलाव से भी पूरी दुनिया को अवगत कराना चाहता है। जम्मू-कश्मीर में जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन को आयोजित करने के पीछे कई वजहें हैं। भारत समूह की अध्यक्षता करते हुए पहला ही सम्मेलन जम्मू-कश्मीर में करवाकर पूरी दुनिया को यहां की वास्तविकता से रूबरू कराना चाहता है। वह यह दिखाना चाहता है कि सभी मोर्चों पर आमूलचूल बदलाव आए हैं। चाहे आतंकवाद का मोर्चा हो या अलगाववाद का, चाहे विकास का मुद्दा हो या फिर बेरोजगारी का, सभी क्षेत्र में बदलाव हुए हैं। जम्मू-कश्मीर के हालात के साथ पाकिस्तान के खिलाफ संदेश जाएगा कि वह अपनी धरती से आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। इसमें सभी देश पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं। दूसरा 370 हटने, परिसीमन आयोग की रिपोर्ट और कश्मीर मुद्दे पर रोजाना राग अलापने वाले पड़ोसी मुल्क को भी सच दिखाने की कोशिश होगी। पाकिस्तानी विदेश विभाग ने अपने घिसे-पिटे आरोपों को दोहराते हुए जम्मू और कश्मीर में व्यापक अत्याचार और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का जिक्र किया। जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खात्मे से चिढ़े हुए पाकिस्तान ने कश्मीर में एकतरफा और अवैध कार्रवाइयों का जिम्मेदार बता दिया है।
ईएमएस/05जुलाई2022