क्षेत्रीय

किसानों की नहीं बिजनेसमेन और निजी कंपनियों की चिंता कर रही केंद्र सरकार : योगेंद्र सिंह

24/09/2020

- पत्रकार वार्ता में कांगे्रस ने किया किसान बिल का खुलासा, कहा कांग्रेस का हाथ किसानों के साथ
शाजापुर (ईएमएस)। केंद्र सरकार जो नया अध्यादेश लाई है उसे किसानों का हितैषी बताया जा रहा है। लेकिन इस बिल की वास्तविकता यह है कि हर बार की तरह इस बार भी केंद्र सरकार किसानों के कंधे पर चढ़कर पूंजीपतियों और बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाना चाह रही है और इसके लिए केंद्र सरकार ने किसानों को मोहरा बनाया है, जिनके हाथ में न जमीन रहेगी न उपज। लेकिन कांग्रेस ने किसानों का अंत तक साथ निभाने का संकल्प लिया है उसे पूरा करेंगे। चाहे इसके लिए कोई भी आंदोलन करना पड़े।
यह बात जिला कांग्रेस अध्यक्ष योगेंद्रसिंह बंटी बना ने गुरुवार को लालघाटी स्थित अपने निवास पर आयोजित पत्रकारवार्ता में कही। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जो तीन अध्यादेश पारित किए गए हैं उससे किसानों को अपनी संपत्ति और अपने निर्वहन का साधन खुद की जमीन से भी हाथ धोना पड़ेगा। मोदी सरकार ने एक तो आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन किया है जिसके जरिये खाद्य पदार्थ की जमाखोरी पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है, जिसका सीधा मतलब है कि अब व्यापारी असीमित मात्रा में अनाज, दालें, तिलहन, खाद्य, तेल और आलू का इकट्ठा भंडारण कर सकते हैं। यदि बड़े व्यापारी असीमित भंडारण करेंगे और किसानों की फसल के आने पर उसे बाजार में उतार देेंगे तो किसानों की उपज की कीमत जमीन पर आ जाएगी और किसानों को मजबूरी में औने-पौने दाम पर अपनी उपज बेचने पर मजबूर होना पड़ेगा। दूसरे अध्यादेश में मोदी सरकार का कहना है कि किसान अपनी फसल को किसी भी राज्य की मंडी में बेच सकता है। यदि ऐसा होता है तो धीरे-धीरे एमपीएमसी मंडियां खत्म हो जाएंगी और तब ट्रेडर्स अपने मन मुताबिक दाम पर किसानों से खरीदारी करेंगे। जबकि यह सरकार सरासर झूठ बोल रही है। पहले भी किसानों को अपनी उपज बाहर बेचने पर कोई प्रतिबंध नहीं था। इस अध्यादेश के नाम पर किसानों को ठगा जा रहा है। तीसरा अध्यादेश में केेंद्र की मोदी सरकार द्वारा कांट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो किसानों के पास उनकी जमीन भी नहीं रहेगी और विवाद की स्थिति में उसे बिचोलिया भी बना दिया गया है। यानि किसानों से उनकी जमीन भी छीन ली जाएगी और रोजगार से भी दूर कर दिया जाएगा। वहंी यदि किसान का विवाद भी कंपनी से होता है तो छोटै किसानों की पूरी पूंजी इस विवाद को सुलझाने में चली जाएगी। आज किसान खुद की जमीन पर मेहनत कर फसल बेचता है और उसका जो भी दाम मिलता है वह उसके पास होता है, जिसे देखकर वह खुश भी हो जाता है और संतोष भी पा लेता है लेकिन केंद्र की मोदी सरकार किसानों से उनकी जमीन तक छीनना चाहती है और इस बिल को लेकर मोदी सरकार किसानों के हितैषी बताकर अपने चहेतों बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाना चाहती है। श्री सिंह ने कहा कि मजदूर हो या किसान उन्हें बरगलाकर यदि उनका हक छीना गया तो यह कांग्रेस पार्टी बर्दाश्त नहीं करेगी। इस बिल को लेकर हम संसद से सड़क तक में विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि इस कोरोना काल में किसान पहले ही परेशान हैं और मौसम की मार उन पर पड़ी है। ऐसे में किसानों के साथ छलावा करना कहां का न्याय है। इस अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी सदस्य नरेश कप्तान, जिला कार्यकारी अध्यक्ष महेंद्रसिंह सेंगर, सहकारिता नेता वीरेंद्रसिंह गोहिल, विधायक प्रतिनिधि आशुतोष शर्मा, जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश मटोलिया, ब्लॉक कांगे्रस अध्यक्ष इरशाद खान, जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि भेरुलाल सौराष्टÑीय, मांगीलाल नायक, मो. साजिद भाई आदि उपस्थित थे। यह जानकारी जिला प्रवक्ता पं. गोविंद शर्मा ने दी।
ईएमएस/24/09/2020