राष्ट्रीय

आरे के 2500 पेड़ बने फडणवीस सरकार की मुसीबत

07/10/2019

- एनजीटी से मिल चुकी थी काटने की मंजूरी
मुंबई (ईएमएस)। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार के सामने नया मुद्दा खड़ा हो गया है। मुंबई की आरे कालोनी में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों को काटा जा रहा है, लेकिन इस मुद्दे पर जोरदार विरोध हो रहा है। करीब 2500 से अधिक पेड़ों का काटा जाना राज्य सरकार के लिए मुसीबत बन गया है। हालांकि ये भी सच है कि इस मसले पर बॉम्बे हाईकोर्ट, एनजीटी की ओर से ग्रीन सिग्नल पहले ही मिल चुका था। मुंबई में मेट्रो प्रोजेक्ट-3 के लिए इन पेड़ों को काटा जा रहा था, लेकिन कई प्रदर्शनकारी, सेलेब्रिटी इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। आरे के इन पेड़ों को मुंबई का फेफड़ा कहा जाता है, कटाई के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गईं। जिसमें इन्हें जंगल घोषित किए जाने की अपील की, ताकि पेड़ ना काटे जा सकें। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इन्हें जंगल नहीं माना और तुरंत पेड़ों की कटाई का काम शुरू हो गया।
बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका से पहले ही पर्यावरण संरक्षण संगठन वनशक्ति और आरे बचाओ ग्रुप के बैनर तले इस मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सामने उठाया गया, जिसके बाद एनजीटी की पुणे बेंच ने दिसंबर 2016 में निर्माण न कराने का आदेश दिया था लेकिन इसके बाद वन विभाग ने आरे कॉलोनी इलाके को जंगल मानने से इनकार किया और इसके बाद एनजीटी ने उस इलाके में केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र वाली जमीन को छोड़कर राज्य की भूमि पर निर्माण को ग्रीन सिग्नल दे दिया। महाराष्ट्र में इस बार चुनाव हैं और इस बीच इस विवाद ने राष्ट्रीय राजनीति में भी जगह बना ली है। भाजपा के साथ गठबंधन में होने के बावजूद शिवसेना ने आरे में पेड़ कटाई का विरोध किया है और ऐसा करने वालों पर कार्रवई लेने की बात की है। आदित्य ठाकरे लगातार सोशल मीडिया पर मोर्चा खोले हुए है, ऐसे में आने वाले दिनों में ये मसला चुनावी दंगल का रूप ले सकता है।
सतीश मोरे/07अक्टूबर
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