क्षेत्रीय

धूल खा रही मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला, नहीं हो रहा मृदा परीक्षण

21/11/2020

अशोकनगर (ईएमएस)। जिले में रबी फसल बुवाई से पूर्व किसान अपनी मिट्टी की मृदा परीक्षण केंद्र पर जांच के आते हैं। जिससे किसानों को जरूरत के हिसाब से उर्वरक नाइट्रोजन कैल्शियम हाइड्रोजन पोटेशियम की मात्रा देने से अच्छी उपज निकलती है। लेकिन इस वर्ष किसानों को रवि फसल में अच्छी निकलने की संभावना नहीं दिख रही है। क्योंकि जिले में मृदा परीक्षण केंद्र की चार लेव व एक-एक लेब ईसागढ़, चंदेरी, मुंगावली मे बनाकर तैयार कर दी है। अशोकनगर की मृदा परीक्षण लैब में तो लाखों रुपए की मशीनें मैकेनिकल उपलब्ध है। वही तहसील मुख्यालयों की लेवल पर भी भरपूर सामग्री उपलब्ध है। मशीनें केमिकल सब भरपूर मात्रा में पहुंच चुके हैं। लेकिन स्टाफ की कमी के कारण मृदा परीक्षण होना संभव नहीं है और ना ही ग्रामसेवक किसानों के बीच पहुंचकर मृदा परीक्षण के बारे में सोच रहे हैं वही अधिक समय बीतने के बाद कम मात्रा में मृदा परीक्षण का टारगेट दिया गया है जबकि लगभग 75 प्रतिशत से अधिक रवि सीजन की बुवाई हो चुकी है। जब मृदा परीक्षण केंद्र की लेवो में जाकर देखा तो कुछ परीक्षण केंद्र दो बंद ही रहे जबकि जिला मुख्यालय पर खुलने वाला परीक्षण केंद्र तो खुला मिला लेकिन ऐसा वातावरण देखा गया कि वहां पर कोई आता ही नहीं पूरे ऑफिस कार्यालय में धूल जमी हुई मशीनों का उपयोग कई दिनों से नहीं हुआ हो उन पर भी धूल जम गई है लैब का ताला लगा हुआ है जिसे खुलकर कोई देखता ही नहीं है लाखों रुपए की केमिकल धूल मिट्टी में डाले हुए हैं। इस तरह से लापरवाही के चलते मृदा परीक्षण केंद्र कार्यालय सामने आ रहे हैं।
-लाखों रुपए की मशीन होने के बाद नहीं पूरा मिट्टी परीक्षण:
अशोकनगर व चंदेरी, मुंगावली, ईसागढ़ की मृदा परीक्षण केंद्र के लोगों में लाखों रुपए की मशीनें खरीद कर रख दी गई है ताकि किसानों को प्रवक्ता के हिसाब से मिट्टी की जांच करा कर उर्वरक तत्वों की कमी को पूरा किया जा सके लेकिन आला अधिकारी स्टाफ की कमी बताते हुए अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।
-केमिकल उपयोग मैं ना आने से नष्ट होने की कगार पर:
जिला बाग तहसील मुख्यालय की मृदा परीक्षण केंद्र की लेवों में परीक्षण के दौरान जो केमिकल का उपयोग किया जाता है बोल लाखों रुपए सरकार के खर्च करने के बावजूद लेवो में पहुंचाया जाता है लेकिन स्टाफ की कमी के कारण या यूं कहें कि आला अधिकारी अपना पल्ला झाड़ते हुए स्टाफ की कमी बताकर बचते नजर आते आगामी कुछ समय में केमिकल नष्ट होने के कगार पर है समय रहते मिट्टी का परीक्षण किया जाता तो जिससे किसानों को भी लाभ पहुंचता और सरकार के खरीदे गए केमिकल को भी सही इस्तेमाल मैं लाया जा सकता
-अब तक नहीं खुल रहे तहसील मुख्यालय की मृदा परीक्षण केंद्र:
किसानों के हित के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है किसान जरूरत के हिसाब से खेतों में रासायनिक खाद बीज दवाइयों का इस्तेमाल करें इसके लिए जिला मुख्यालय व तहसील मुख्यालयों पर अशोकनगर जिला में चार मृदा परीक्षण केंद्र की बिल्डिंग तैयार कर आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा कर स्टाफ को भेज दिया है लेकिन कर्मचारी अधिकारियों की लापरवाही के चलते कहीं तहसील मुख्यालय के मृदा परीक्षण केंद्र में हफ्ते में 1 दिन या 2 हफ्ते में एक-दो दिन पहुंच जाते हैं वही किसान मृदा परीक्षण के लिए आते हैं तो उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ता है जब आला अधिकारियों से इस मामले में शिकायत की जाती है तो वह स्टाफ ना होने की कमी बताकर किसानों को निराश होकर वापस लौटना पड़ता है ।
-नवंबर के अंत में आया मृदा परीक्षण का टारगेट:
रवि सीजन के बुबाई अक्टूबर के अंत से नवंबर मैं अधिकतर पूरी तरह से हो जाती है बुवाई से पूर्व किसान अपने खेतों की मिट्टी का परीक्षण कराने आते हैं लेकिन इस वर्ष किसान मिट्टी का परीक्षण नहीं करा सके अधिकारियों द्वारा बताया गया कि नवंबर के आखिरी समय में मृदा परीक्षण करने का टारगेट दिया गया है जबकि इस समय लगभग 75 प्रतिशत रवि सीजन की हो चुकी है बकाया रही 25 प्रतिशत कुछ ही दिनों में पूर्ण होने वाली है इस तरह की लापरवाही के चलते किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
-परीक्षण ना होने से किसानों को रवि फसल का घाटा:
हर वर्ष किसान जितनी भूमि को उर्वरक तत्व की आवश्यकता होती थी वह परीक्षण करवाने के बाद उपयोग करते थे लेकिन इस वर्ष मिट्टी का परीक्षण नहीं हो सका जिसके कारण कई लोग तो अधिक उर्वरक का प्रयोग कर रहे हैं वाकई कम मात्रा में डालेंगे जिसके कारण उपज कम निकलने की संभावना है।
ओमप्रकाश/21/11/2020