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(मुरैना) ढाई दिन के मेहमान बनकर आए द्वारिकाधीश का उत्सव लीला मेला में

09/11/2018

मुरैना (ईएमएस)। ढाई दिन के लिए मेहमान बनकर आए भगवान कृष्ण का इन दिनों मुरैना गांव दाऊ जी मंदिर पर विशेष उत्सव मनाया जा रहा है। परम्परागत यह त्यौहार दीपावली के बाद पडवा से प्रारंभ हो जाता है और यहां मंदिर के परिसर में इस दौरान विशेष मेला का आयोजन किया जाता है। इसमें अधिकांशत: ग्रामीण लोग अपने संसाधनों से आते हैं और मेले में पूरे पांच दिन तक रहकर आनंद लेते हैं। यह मेला धार्मिक और सामाजिक रूप से माना जाता है। कई समाजों की पंचायतें और मेले में शादी विवाहों के रिश्ते भी तय किए जाते है। लीला मेला का आयोजन के पीछे किवदंती है कि भगवान कृष्ण ढाई दिन के लिए मेहमान बनकर मुरैना आते हैं। इन दिनों द्वारिकाधीश के पट बंद रहते हैं। इसके साथ ही मुरैना गांव में स्वामी परिवार को उनका सेवक माना जाता है। पिछले 15 दिन के अंदर एक बालक जन्म लेता है जिसे कृष्ण का रूप माना जाता है उसे लेकर मंदिर के तालाब के किनारे तक रथ पर सवार होकर आते है। पूर्व की कथाओं की माने तो एक नागराज उनके करते हैं, लेकिन इन दिनों तालाब में पानी कम होने से नागराज भी नहीं दिखाई देते हैं। लेकिन परम्परागत मेले का उत्सव मनाया जाता है और ढाई दिन तक भगवान कृष्ण के स्वागत समारोह का जश्न मनाया जाता है। इसी क्रम में पडवा से ग्रामीण अंचलों से लेकर भारी मात्रा में लोगों ने पहुंचकर आनंद लिया। यहां ग्रामीणों के उपयोग के सामान भी विक्रय होते हैं और प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती है। घुड दौड, कुश्ती आदि कई प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती है। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं। मेले में थाना प्रभारी अलग से नियुक्त किया जाता है दो दिन से उमडती भीड के बीच रंगारंग कार्यक्रम भी जनता को लुभाने वाले किए जाते हैं। आज दूसरे दिन भी मेले में महिला पुरूषों की संख्या अधिक रही। मुरैना सबलगढ मार्ग से अंदर तीन किमी तक रास्ता भी काफी अवरूद्ध रहा एवं मुरैना लीला मेला में शांति व्यवस्था के चलते मेले में विभिन्न प्रकार के आयोजन सम्पन्न किए जा रहे हैं।
जेल में भाईदूज का त्यौहार मनाने पहुंची बहनें
दीपावली त्यौहार के बाद दूसरे दिन भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है, जिसमें बहनें अपनी भाई की लम्बी उमर की दुआ करते हैं और भाई उन्हें सुरक्षा का वचन देता है। इसके अलावा दौज का त्यौहार हिन्दू परम्परागत तरीके से हर घर के दरवाजे पर गाय के गोबर से दौज रखी जाती है और पहले उसकी पूजा अर्चना कर लोग दूसरा कार्य करते हैं। इसके साथ ही किसी यम दुतिया का भी पर्व मनाया जाता है, जो भाई बहन यमुना में स्नान कर पूजा अर्चना करते हैं उन्हें यम का भय भी नहीं सताता और दोनों भाई बहन पाप से मुक्त होकर सुख समृद्धि की ओर जाते हैं। मुरैना में यह त्यौहार परम्परागत तरीके से सुबह से ही मनाया गया। प्रमुख रूप से मुरैना उपजेल में विभिन्न अपराधों में बंद कैदियों को उनकी बहनों ने तिलक किया और उनकी आरती उतारकर उनकी सुख समृद्धी की कामना की। इस अवसर पर कैदियों ने अपराधिक जीवन से निजात पाने के लिए प्रभू से प्रार्थना की और बहनों को वचन भी दिया। दिनभर जेल में काफी संख्या में लोगों ने इस त्यौहार का धर्म निभाया और हर घर में बहन भाई का त्यौहार धूमधाम से मनाया।
चन्द्रबली सिंह / 09 नवम्बर 2018