क्षेत्रीय

रंग पंचमी पर आज करीला में लगेगा मन्नतों का मेला

24/03/2019

रात भर दिखेगा राई-नृत्य का जलवा, लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
अशोकनगर (ईएमएस)। रंगपंचमी के मौके पर करीला में मां जानकी दरबार का नजारा ही जुदा होता है। जहां लगने वाला मेला देशभर में खासा प्रसिद्ध है। यहां पर माता सीता और लव-कुश के मंदिर पर लोग अपनी मन्नतें मांगने आते हैं और मनोकामना पूरी होने पर बधाई के रूप में मां जानकी के दरबार पहुंचकर राई नृत्य करवाते हैं। यह देश का एक मात्र ऐसा मेला है, जहां राई नृत्य देखने के लिए सिर्फ एक दिन में लाखों की भीड़ आती हैं। करीला की प्रसिद्धि राई नृत्य से ही है। मशालों की रोशनी में ढोलक की थाप पर उनका बुंदेलखण्डी राई नृत्य देखते ही बनता है। महिलाएं पथरीले मैदान पर नंगे पैर नृत्य करके मन्नत मांगती हैं।
रंगपंचमी मेले के शुरुआती दिन रविवार को भी बड़ी संख्या में यात्री जिला मुख्यालय पहुंचे। इससे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड पर खासी भीड़ गई श्रद्धालुओं को मेला स्थल पर पहुंचाने के लिए बसों का रूट बदल कर चलाया गया। वहीं मैजिक वाहन ऑटो जीप आदि सभी लोगों ने यात्रा कि इसके बावजूद सवारियों को ढोने वाले वाहन ओवरलोड चले। रंगपंचमी पर मेले का मुख्य दिन होने के चलते सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कराई गई हैं। मेला स्थल पर लोगों के मनोरंजन के लिए दुकान, झूले भी सज गए हैं। राई नृत्य के लिए वीडियो सहित अन्य जनजाति की हजारों की संख्या में नृत्यांगना भी मेला प्रांगण में पहुंच चुकी हैं।
अश्वमेध यज्ञ से जुड़ा हुआ है करीला का इतिहास:
कहा जाता है कि लंका से वापस लौटने के बाद जब भगवान राम अयोध्या के राजा हो गए और माता सीता अयोध्या की महारानी थी। उसी समय किसी लोकोपवाद के कारण भगवान राम ने सीता जी का त्याग किया तो लक्ष्मण जी उन्हें करीला स्थित निर्जन वन में छोडक़र चले गए थे। यहां पर महर्षि बाल्मीकि का आश्रम था, जिसमे सीता जी ने अपने पुत्रों को जन्म दिया और लव-कुश ने यहीं पर शिक्षा-दीक्षा ली। कहा जाता है कि इसी जगज पर लव-कुश ने भगवान राम के अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े को पकडक़र बांध लिया था।
ये है मान्यता:
मान्यतानुसार जब यहां लव-कुश का जन्म हुआ तब स्वर्ग से अप्सराओं ने उतरकर नृत्य किया था। बस तभी से यहां राई व बधाई नृत्य करवाने का दौर शुरू हुआ। इसके लिए बड़ी संख्या में नृत्यांगनाएं मंदिर पर पहुंचती हैं। मान्यता है कि लवकुश और माता सीता के इस मंदिर में नि:संतान दंपती की सारी मनोकामना पूरी हो जाती है, तो उन्हें यहां नृत्यांगनाओं को नचाना होता है। इस मंदिर की लोग अपने घर में भभूति लेकर जाते हैं। माना जाता है कि यह खेत में कीटाणु नाशक और इल्लीनाशक का भी काम करती है और किसान मानते हैं कि इस भभूति को फसल पर डालने से चमत्कारी ढंग से इल्लियां गायब हो जाती हैं। किसान हर साल यहां आकर भभूति लेकर जाते हैं, और अपनी को फसल में डालते हैं।
दिखेगीं अव्यवस्थाएं:
इस बार करीला मेले का आयोजन अव्यवस्थाओं के बीच होगा। लोकसभा चुनाव के चलते इस बार तैयारियों के लिए पर्याप्त समय नही मिल सका। जिसके कारण सडक़ से लेकर कई काम अधूरे रह गए। जबकि आनन-फानन में कई जगह पेंचवर्क के नाम पर मुरम ही डाली गई। जिससे वाहन चालकों को काफ ी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। पिछली बार राई नृत्य के लिए तत्कालीन कलेक्टर द्वारा राई के लिए चबूतरे बनवाए थे लेकिन चबूतरों की संख्या कम होने के कारण यह व्यवस्था कारगर सावित नही हुई। ऐसी स्थिती में इस बार भी बधाई लाने वालों को खेतों में ही पथरीली जगह में बधाई करवाना पड़ेगी और नृत्यांगनाएं यहां वहां पथरीली जगह पर राई नृत्य करती नजर आएगी। जबकि करीला में राई नृत्य की ही एक परम्परा है।
कलेक्टर ने लिया जाजया:
कलेक्टर डॉ. मंजू शर्मा एवं अन्य अधिकारियों द्वारा रंगपंचमी पर मां जानकी मंदिर करीला धाम में लगने वाले वार्षिक मेले की तैयारियों तथा व्यवस्थाओं के संबंध में तैयारियों का जायजा लिया गया। कलेक्टर ने बताया कि मेले में आने वाले श्रृद्धालुओं की सुविधाओं एवं सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई है। जिसके लिए मेला क्षेत्र में टोटियांयुक्त टेंकर नियत स्थानों पर रखवाए गए हैं तथा नि:शुल्क पेयजल के बोर्ड लगाए गए हैं। उन्होंने सम्पूर्ण मेला क्षेत्र में विद्युत व्यवस्था तथा विद्युत सुरक्षा व्यवस्था बेहतर से बेहतर कराये जाने के निर्देश अधिकारियों को दिये। साफ-सफाई हेतु मेला क्षेत्र में बड़े एवं छोटे डस्टबिन अलग-अलग स्थानों पर रखे जाने के निर्देश दिए। इस दौरान कलेक्टर सहित अधिकारियों द्वारा मेला स्थल पर की गई तैयारियों एवं व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान परिक्रमा मार्ग, व्हीआईपी पार्किंग, मंदिर दर्शन मार्ग, श्रृद्धालुओं को पीने के पानी की व्यवस्था, कंट्रोल रूम, माईक द्वारा किये जाने वाले एनाउन्समेंट, मजिस्ट्रेट डयूटी का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए।
अगरबत्ती एवं प्लास्टिक की पोलीथीन विक्रय पर पूर्णत: प्रतिबंध:
कलेक्टर ने निर्देशित किया है कि पूर्व वर्ष की भांति इस वर्ष भी अगरबत्ती एवं प्लास्टिक की पोलीथीन विक्रय पर पूर्णत: प्रतिबंध रहेगा। नरियल पूर्व से निर्धारित स्थानो पर चढ़ाए जावेगे। पूर्व वर्ष की भाति इस बार भी मंदिर परिसर के अन्दर नारियल एवं झण्डे ले जाना प्रतिबंधित रहेगा। नारियल एवं प्रसाद चढ़ाने की व्यवस्था सुसस्जित स्टेण्ड पर ही श्रृद्वाभाव से अर्पण होगा, इस हेतु माईक से लगातार दर्षनार्थियो को प्रेरित किया जायेगा। परिक्रमा मार्ग पर सांकेतिक चिन्ह की व्यवस्था की गई है। बधाई, राई नृत्य मंदिर परिसर के आस-पास एवं प्रतिबंधात्मक क्षेत्र में नहीं होने दिया जाएगा।
1200 जवान रहेंगे तैनात:
करीला मेले में आने वाली 15 से 20 लाख श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मेले में एक हजार पुलिस जवान तैनात रहेंगे, इसके अलावा होमगार्ड और फॉरेस्ट के 200 जवानों की भी ड्यूटी लगाई गई है। साथ ही तीन एडिशनल एसपी और नौं डीएसपी रैंक के अधिकारी भी रहेंगे। एडिशनल एसपी सुधीर शिवहरे के मुताबिक एक हजार पुलिस जवानों की मांग की गई है, जिन्हें करीला भेजा जा रहा है। इसके अलावा जिले की पुलिस भी रहेगी। एडिशनल एसपी का कहना है कि मेले में पहले ड्यूटी दे चुके और अनुभवी पुलिस अधिकारियों और जवानों को भी बुलाया गया है। ताकि सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था हो सकें।
प्रवीण/24/03/2019