अंतरराष्ट्रीय

धीरे-धीरे सिकुड़ रहा पांडो

09/09/2019

-मंडरा रहे संकट के बादल
लंदन (ईएमएस)। यह यूटाह के 106 एकड़ फिशलेक नैशनल फॉरेस्ट में 13 मिलियन पाउंड बड़ा पांडो हजारों साल से लहरा रहा है, लेकिन अब यह धीरे-धीरे सिकुडता जा रहा है। इसके अस्तित्व पर संकट के बादल छा रहे हैं। यह करीब 40,000 पेड़ों का समूह है जो कि प्राकृतिक रूप से एक पेड़ क्लोन के रूप में निकले हैं। स्टडी में खुलासा हुआ है कि प्रकृति का खजाना है जिसका किसी को अहसास भी नहीं, इस पर सैकड़ों आश्रित हैं लेकिन यह धीरे-धीरे सिकुड़ रहा है। जंगल का मैनेजमेंट ठीक न होने की वजह से जानवर इनसे अपना भोजन ले रहे हैं और यह धीरे-धीरे सूख रहा है। पांडो कैसे इतना बड़ा हो गया, यह आज भी एक रहस्य है। पांडो बैलेंस में नहीं हैं, इकॉलजिस्ट पॉल रॉजर्स और डैरेन के मुताबिक पुराने पेड़ मर रहे हैं लेकिन नए पेड़ उनकी जगह नहीं ले रहे हैं। शायद इन्हें खाया जा रहा है या रौंदे जा रहे हैं। रॉजर्स के मुताबिक, 'अगर हम इन्हें बचा सके तो कुछ सबक हैं जिनसे हम हजारों स्पीशीज को बचा सकते हैं।' माना जा रहा है कि शायद यह दूसरे क्लोन्स के साथ रहा और वक्त के साथ बढ़ता गया। ये अलैंगिक रूप से रिप्रोडक्शन करते हैं। यानी कि बीज से उगने के बजाए पेड़ में ही जड़ से प्रस्फुटित होते हैं। पांडो एक लैटिन शब्द है जिसका मतलब है, 'मैं फैलता हूं' यह पृथ्वी पर सबसे बड़ा जीव है। यह अपने आप में एक जंगल की तरह ही है जिसमें सारे पेड़ एक रूट सिस्टम से जुड़े हैं और सबका डीएनए भी एक सा है। जेनेटिकली यह मेल है।
सुदामा/ईएमएस 09 सितंबर 2019