लेख

गिरते मूल्य, उलझता चरित्र (लेखक -डॉ. शशि तिवारी)

07/10/2019


भौतिकवाद की आपाधापी एवं पश्चिम सभ्यता के अनुसरण ने न केवल भारतीय संस्कृति को तहस-नहस किया है बल्कि सामाजिक मूल्यों का भी हृास किया हम सिर्फ गंदगी के दलदल में धसने की अंधी दौड़ में सिर्फ दौड़े ही जा रहे है। समय का चक्र तेजी से घूम रहा है। पश्चिम के लोग भारतीय मूल्यों एवं सस्कृति को तेजी से अपना रहे है क्यांेकि, उसके न केवल अपने फायदे है बल्कि शांति प्राप्ति का भी मार्ग है । भारतीय मूल्यों में नैतिकता को सर्वोच्च माना गया है तभी तो कहा भी जाता है पैसा गया तो कुछ नहीं‘‘ स्वास्थ्य गया तो कुछ गया लेकिन इज्जत गई तो सब कुछ गया‘‘ यह बात बड़े दीर्घ अनुभवों के बाद बात कही गई।
आज समाज के जिस प्रकार की मानसिक विकृति जिस तीव्र गति से बढ़ रही है यदि उसे समय रहते नहीं रोका गया तो समाज की धारणा ध्वस्त हो जायेगी। यहाँ समाज की कुछ ज्यादा ही जिम्मेदारी है यदि किसी व्यक्ति का नैतिक मूल्यों के विरुद्ध किसी भी प्रकार का आचरण है तो उसका सार्वजनिक विरोध भी करना चाहिए न कि दबाने में लगे। बुरा कृत्य करने वाला आदमी चाहे कोई भी अर्थात् लोक सेवक हो या जन सेवक हो या अन्य। बुरा कृत्य हमेशा बुरा ही होता है फिर किया गया कृत्य मजबूरी में हो या शौक मे हो। भारतीय संस्कृति में महिला का स्थान सर्वोच्च है, दैवी, जननी, घर की धुरी, माना गया है। स्त्री ही बालक की पहली गुरु होती है, उसी की साधना, तपस्या से ही देश समाज को एक स्वस्थ नागरिक मिलता है।
दूसरी और सुरा, सुन्दरी और सत्ता का नशा आदि अनादि काल से चला आ रहा है और यह भी निर्विवाद सत्य है कि जो इस नशे में डूबा उसका न केवल विवेक का नाश हुआ बल्कि उसने सत्ता और समाज दोनों को ही गर्त में पहुंचाया।
हाल ही में ‘‘हनी टेªप‘‘ मामले में एक बात तो पूर्णतः स्पष्ट हो गई क्या नेता क्या अफसर क्या व्यापारी क्या अन्य सभी की संलिप्तता रही ंदबी जुबां मे ंउजागर नामो ने सभी वर्गों को बदनाम किया है। यहाँ यक्ष प्रश्न उठता है बात-बात पर अपनी आन-बान-शान का दावा करने वाले, धरना प्रदर्शन रेली करने वाले समाज के ठेकेदार कहाँ है? क्यों नही विरोध किया? क्यो नही समाज को कलंकित करने वालों के विरुद्ध अभियान चलाते ? ताकि भविष्य में कोई भी अनैतिक डगर पर चलने के पहले सौ बार सोचे। निःसंदेह कानून अपना काम करता है, लेकिन, जब पूरे कुए में ही भांग घुली हो तो कुकृत्य करने वालों के बच निकले की पूरी-पूरी संभावना हो भी जाती हैै। एक समय था जब जातियां ही देह व्यापार के लिए जानी जाती थी लेकिन सरकार के प्रयास एवं उनके शिक्षा के प्रचार-प्रसार से उस समाज में व्याप्त कुरूतियों का काफी हर तक उन्मूलन हुआ है, लेकिन ऐसे लोगों के बारे में क्या कहा जाए जो शिक्षित है वह न स्वयं बल्कि अन्य भोली-भाली ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियांे को सुनहरा भविष्य, नौकरी का लालच दे देह व्यापार में उतारती है ये न केवल महिलाओं को दुश्मन है बल्कि समाज की भी गुनाहगार है, कुछ लोगों की वजह से न केवल परिवार बल्कि समाज में भी जिल्लत होती है। निःसंदेह आज व्यक्ति दो चेहरों के ही साथ जी रहा है। वर्तमान सामान्य प्रशासन मंत्री गोविंद सिंह का कहना सर्वथा उचित है कि ’’हनी ट्रेप’’ में सम्मिलित नेता एवं अफसरों का सार्वजनिक जुलुस निकाला जाना चाहिए एवं ऐसे अधिकारियों सेवा से बर्खास्त भी करना चाहिए साथ ही नेताओं को भविष्य में टिकिट भी नहीं देना चाहिए।
तो निःसंन्देह लोक सेवक, जन सेवक एंव अन्य का सार्वजनिक जीवन में आचरण केवल मर्यादित होना चाहिए बल्कि उनके अनुयाइयों के अनुसरण के लिए आदर्श युक्त भी होना चाहिए।
ईएमएस/07 अक्टूबर2019