लेख

नमो टी वी और आचार संहिता (लेखक- डॉ. अरविन्द जैन / ईएमएस)

15/04/2019

कृष्ण के मुख में किसी ने माखन लिपटाया, जब उनकी माँ ने उनसे पूछा की तुम्हारे मुख पर माखन किसने लगाया तो कहने लगे मो नहीं माखन खाओ, ग्वाल बाल मोहे मुख पर माखन लिपटाओ। एक मुहल्ले का पहलवान फुर्सत में रहता और चौराहे पर बैठा रहता, हर कोई बच्चे से पूछता बताओ अमेरिका का राष्ट्रपति कौन हैं तो बच्चा बौलता और रहो घर में, बाहर निकला करो ज्ञान बढ़ेगा, ट्रम्प हैं, दूसरे दिन पहलवान ने बालक से पूछा ब्रिटेन का प्रधान मंत्री कौन हैं, बालक चुप तो पहलवान ने बताया मे हैं, तीसरे दिन पहलवान ने बालक से पूछा भारत का राष्ट्रपति कौन हैं, तो लड़के ने नहीं बताया तो पहलवान बोलै कोविंद जी हैं, इस प्रकार बालक रोज रोज की पढाई से तंग आ कर चौथे दिन बालक पूछा ने पूछा पहलवान हीरालाल कौन हैं इस पर पहलवान चुप रहा तब बालक ने कहा रोज बाहर घुमा करो, वह रोज तुम्हारे घर जाता हैं !
इसी प्रकार नमो टी वी इस समय बहुत तेज़ी से चल रही हैं जो मोदी जी का खुला प्रचार कर रही हैं और मोदी जी का कहना हैं की मुझे नहीं मालूम हैं, यह क्या संभव हैं ? क्या मोदी जैसे तानाशाह और एकला चलने वाला व्यक्ति की इच्छा वगैर कोई पत्ता हिल सकता हैं, असंभव पर वह जान भूझ कर झूठ बोलते हैं जो उनके जन्मजात गुण हैं, बिना झूठ बोले उन्हें खाना नहीं पचता, दिन रात उनके गुणों का वर्णन करता हैं टी वी चॅनेल और उन्हें पता नहीं।
मजेदार बात यह हैं की इस टी वी को सूचना प्रसारण मंत्रालय से कोई
स्वीकृति नहीं मिली और न आजतक इस टी वी का मालिक कौन हैं का पता चला ? क्या यह बी जे पी का प्रचार तंत्र हैं। आखिर इतना कुछ हो रहा हैं और प्रधान सेवक अनभिज्ञ कैसे हो सकते हैं ? इसका खरच कौन वहन कर रहा हैं ?क्या इस प्रकार का विज्ञापन और प्रचार आचार संहिता का उल्लंघन नहीं हैं ?क्या इस प्रकार की सुविधा अन्य पार्टी को भी प्रदाय की जाना चाहिए। इस बात को आधार लेकर सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां भी नमो टी वी जैसे समूह में मांग करे। इस पर सूचना प्रसारण मंत्रालय क्या कार्यवाही करता हैं और चुनाव आयोग क्या बंदिश लगाता हैं।
क्या इस टी वी का मालिक कोई नहीं है या बिना मालिक के चल रहा हैं या बिना धन के सर्कार व्यय पर प्रसारण होना चाहिए, यह भी खुले रूप से भ्रष्टाचार के अंतरगत आता हैं। इस पर को कार्यवाही करेगा और किस पर कार्यवाही करेगा। इतना बड़ा छल खुले आम जनता और शासन और प्रशासन के सामने हो रहा हैं और सब मूक बधिर जैसे बैठे हैं, इसका मतलब इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह काम कर रहा हैं। जैसा की कहा जाता हैं की यदि कोई चूहा, बिल्ली को आँख दिखाए तो समझो चूहा का बिल नजदीक हैं। इसी प्रकार नमो टी वी पर पार्टी और सत्ता का खुला प्रशय होने से दबंगता के साथ चल रहा हैं और कोई भी कार्यवाही नहीं करने का साहस कर पा रहा हैं।
चुनाव आयोग बिना रीढ़ का हैं वह इतना कमजोर हैं की कोई भी कार्यवाही करने में ढीलापन अख्तियार करता हैं, जैसे होली में आग लगी और सावन में आग बुझाएंगी। न योगी के ऊपर कार्यवाही की न कल्याण सिंह पर कुछ भी नहीं किया। जो स्वयं कार्यवाही करने में सक्षम हैं वह दूसरे की पाली में डालकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर देते हैं।
नमो टी वी भी भ्र्ष्टाचार का खुला खेल हैं और आचारसंहिता का खुला उल्लंघन हैं इस आधार पर नमो का चुनाव रद्द किया जाना चाहिए जिससे अन्यों को भी शिक्षा मिल सकेगी, और अन्य सभी राजनैतिक पार्टियों को भी इस प्रकार के प्रसारण की अनुमति मिलनी चाहिए।
15अप्रैल/ईएमएस