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पिता बाल ठाकरे की राह पर चले उद्धव, मातोश्री पहुंच खेला 3 दशक पुराना कार्ड

23/06/2022

मुंबई (ईएमएस)। मुख्यमंत्री पद छोड़ने की पेशकश करने के कुछ ही घंटों बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार रात दक्षिण मुंबई स्थित अपना आधिकारिक आवास खाली कर दिया और बांद्रा स्थित अपने निजी आवास चले गए। ठाकरे मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ को खाली करके ठाकरे परिवार के निजी आवास ‘मातोश्री’ चले गए। उद्धव के इस कदम को इमोशनल कार्ड के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि शिंदे द्वारा दो दिन पहले बगावत किए जाने और बागी विधायकों के तेवर में कोई नरमी नहीं आने के बीच ठाकरे ने यह कदम उठाया है। लगभग दो दशक पहले, जुलाई 1992 में, शिवसेना के भीतर उसकी कार्यशैली को लेकर इसी तरह की बगावत देखने को मिली थी। तब शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे ने सार्वजनिक रूप से पार्टी से इस्तीफा देने और पार्टी से संबंध तोड़ने की पेशकश करके कई लोगों को चौंका दिया था। बाल ठाकरे ने पार्टी के मुखपत्र सामना में लिखा था, "अगर एक भी शिवसैनिक मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ खड़ा होकर कहता है कि मैंने आपकी वजह से शिवसेना छोड़ी या आपने हमें चोट पहुंचाई, तो मैं एक पल के लिए भी शिवसेना प्रमुख के रूप में बने रहने के लिए तैयार नहीं हूं। उनके इस लेख ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा असर दिखाया था। लाखों की संख्या में शिवसैनिक बाल ठाकरे के समर्थन में रैलियां निकालने लगे थे। यही नहीं, बाल ठाकरे के उस कदम ने सुनिश्चित किया कि 20 साल बाद उनकी मृत्यु तक उन्हें इस तरह के विद्रोह का सामना नहीं करना पड़ा। अब, उस भाषण के तीन दशक बाद, जूनियर ठाकरे भी उसी मौड़ पर वापस आते दिख रहे हैं। उद्धव ने बुधवार को कहा कि उन्होंने कभी कुर्सी या पद या सत्ता की लालस नहीं रखी और अगर किसी शिवसैनिक ने उनके पद छोड़ने को कहा तो इसे छोड़ने को तैयार हैं।
अजीत झा/देवेंद्र/नई दिल्ली/ईएमएस/23/जून /2022