लेख

दो सीटों से क्यों लड़ रहे हैं राहुल गांधी (लेखक-अजित वर्मा / ईएमएस)

14/04/2019

राहुल गांधी इस बार दो लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। वे अपनी परम्परागत सीट अमेठी के साथ ही दक्षिणी राज्य केरल के वायनाड लोकसभा क्षेत्र से च़ुनाव लड़ने जा रहे हैं। राहुल ने वायनाड से नामांकन पत्र भर दिया है, अब वे अमेठी से भी नामांकन भरेंगे। दो सीटों से चुनाव लड़ने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ दूसरी बार चुनाव मैदान में उतरने जा रहीं भाजपा केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल पर निशाना साधते हुए कहा कि यह अमेठी की जनता का अपमान और उनके साथ धोखा है।
राहुल के दो सीटों पर चुनाव लड़ने का एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि पिछले 2014 के चुनाव में अमेठी में राहुल का जीत का अंतर घटकर 1 लाख वोट रह गया था इसलिये हार के डर से राहुल गांधी दो सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं।
राहुल गांधी की दादी श्रीमती इंदिरा गांधी भी एक बार यूपी की रायबरेली की सीट के अलावा कर्नाटक की चिकमंगलूर सीट से तथा राहुल की मां श्रीमती सोनिया गांधी भी रायबरेली के साथ ही कर्नाटक के बेल्लारी सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं। दोनों ने ही दोनों सीटों से जीत भी हासिल की थी। अब राहुल गांधी ने भी अपनी दादी और मां की तरह पहली बार दक्षिण का रुख किया है। राहुल ने वायनाड से नामांकन भरने के बाद यह कहा कि वो इस बार उत्तर के अलावा दक्षिण से भी चुनाव लड़ने जा रहे हैं क्योंकि दक्षिण की संस्कृति और समस्याएं भी अलग तरह की हैं और वे इन पर ध्यान देना चाहते हैं।
दक्षिणी राज्य हमेशा- कांग्रेस के संकट में साथ निभाते रहे हैं। 1977 में आपातकाल के बाद जब लोकसभा के चुनाव हुए थे तब भी दक्षिण ने श्रीमती इंदिरा गांधी को 145 सीटें दी थीं। पिछले चुनाव में कांग्रेस को पूरे देश से जो 44 सीटें मिलीं थीं उनमें से 17 सीटें कांग्रेस को केरल और कर्नाटक ने दी थीं। इससे साबित होता है कि दक्षिणी राज्य कांग्रेस के संकट के साथी हैं। राहुल गांधी ने भी इस बार दक्षिणी राज्यों पर ध्यान केन्द्रित किया है। पहले उनका नाम कर्नाटक से चुनाव लड़ने के लिये चर्चाओं में आया था लेकिन वे केरल के वायनाड से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। वायनाड ऐसा क्षेत्र है जो कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा पर है। इस तरह राहुल गांधी केरल के साथ ही कर्नाटक और तमिलनाडु पर भी ध्यान केन्द्रित कर पायेंगे।
केरल अब वामपंथियों की सत्ता का आखरी राज्य बचा है। इसलिये इस राज्य में राहुल गांधी के धमक जाने से वामपंथी दल बौखला गए हैं। कामरेड प्रकाश कारंत कहते हैं कि हम राहुल गांधी को हरायेंगे। राहुल गांधी कहते हैं कि वो साम्यवादियों के खिलाफ कुछ नहीं बोलेंगे। साम्यवादियों को खतरा हो चला है कि राहुल के बहाने कांग्रेस केरल में पैर पसार लेगी। केरल में हाथ और हसियां के बीच कड़ा मुकाबला होने की स्थिति बन गयी है।
राहुल गांधी के दक्षिण में दस्तक देने से कांग्रेस की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद तो की जा रही है लेकिन राहुल की बदौलत दक्षिण में कांग्रेस को कितना फायदा होगा ये तो चुनावी नतीजों से पता चल सकेगा। यह भी पता चल पायेगा कि राहुल गांधी दोनों सीटों से जीतते हैं या नहीं।
14अप्रैल/ईएमएस