लेख

(विचार-मंथन) बड़ी राहत (लेखक-सिद्धार्थ शंकर / ईएमएस)

22/05/2020


लॉकडाउन के बाद से जारी पाबंदी के कारण बड़ी संख्या में लोग देश के तमाम हिस्सों में फंस गए हैं और उन्हें अपने घर लौटना है। इसके अलावा जरूरी काम से लोगों को देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से जाना भी है। ऐसे में रेल सेवाएं और विमान सेवाएं शुरू करना अब अपरिहार्य हो गया था। लेकिन यह सेवा भविष्य में दिक्कत न बने, इसका ख्याल सरकार और जनता दोनों को रखना होगा। देखा जाए तो कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए जारी लॉकडाउन के बीच देश की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन को पटरी पर लाने की एक और बड़ी कवायद के तौर पर यात्री ट्रेनों और विमान सेवाओं को शुरू किया गया है। राज्यों ने अपने यहां औद्योगिक गतिविधियों को फिर से चालू करने का फैसला किया था। हालांकि देश में रेल और विमान सेवाएं शुरू करने को लेकर सरकार फूंक-फूंक कर कदम इसलिए रख रही थी कि कहीं अचानक से स्टेशनों पर भीड़ न उमड़ आए और संक्रमण फैलने का खतरा खड़ा न हो जाए। इसलिए सीमित संख्या और कई तरह के प्रतिबंधों के बीच ही ट्रेनों के परिचालन की अनुमति दी गई है। हालांकि, एक जून के लिए डेढ़ लाख से ज्यादा यात्रियों ने टिकट बुक कराई है। यात्रा शुरू करने के दिन जब ये सभी यात्री स्टेशन पहुंचेंगे, तब कोरोना के संक्रमण से बचना और बचाना रेलवे के लिए बड़ी चुनौती होगा। इसी तरह की तस्वीर 25 मई को एयरपोर्ट पर भी नजर आने वाली है।
लेकिन इसका एक पहलू यह भी है कि लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में लोग देश के तमाम हिस्सों में फंस गए हैं और उन्हें अपने घर लौटना है। इसके अलावा जरूरी काम से लोगों को देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से जाना भी है। तथ्य यह भी है कि रेलवे भी लंबे समय तक अपना परिचालन बंद नहीं रख सकता। रेलवे के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब पूरे देश में इतने लंबे वक्त तक ट्रेनों के चक्के ठहरे रहे हों। सिर्फ कुछ मालगाडिय़ां और विशेष कामों जैसे अर्धसैनिक बलों और प्रवासी मजदूरों को लाने-ले जाने के लिए गाडिय़ां चलाई गईं। हालांकि, इससे रेलवे के राजस्व में कुछ नहीं आया। लिहाजा यह सारा उपक्रम सिर्फ समाजसेवा बनकर साबित हुआ। लॉकडाउन के दौरान सरकार इस वास्तविकता को समझ चुकी है कि रेल सेवाएं बंद करने का जो चौतरफा प्रभाव पड़ता है, वह कितना नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है। इसमें कोई शक नहीं कि आम रेलयात्रियों के लिए गाडिय़ां चलाने का फैसला जोखिम और चुनौतीभरा है। बहरहल, एक जून से जब रेलवे की सुविधा शुरू होगी तब ट्रेन से यात्रा करना यात्रियों के लिए कई मायनों में एक नए तरह का अनुभव लिए होगा। सुरक्षित दूरी रखने और मुंह को ढकने जैसी जरूरी शर्तों का पालन करना होगा। विशेषज्ञ भी इस बात पर जोर दे रहे थे कि लॉकडाउन-3 की अवधि पूरी होने के साथ ही रेल, बस और हवाई सेवाएं शुरू कर दी जानी चाहिए। अब सरकार ने हवाई और रेल सेवाओं का दिन तय कर दिया है।
अभी सरकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कोरोना संक्रमितों के इलाज और महामारी को फैलने से रोकने की है। इसलिए रेलवे ने बड़ी संख्या में अपने डिब्बों को मरीजों के लिए वार्ड के रूप में तैयार रखा है। लेकिन अब चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन के दौर से निकलना भी जरूरी है। जिन क्षेत्रों में खतरा बहुत ज्यादा है, उन्हें छोड़ कर देश के बाकी हिस्सों में बस जैसे सार्वजनिक परिवहन को भी अनुमति दी जानी चाहिए। जब तक अंतरराज्यीय सीमाएं नहीं खुलेंगी, निजी वाहन नहीं चलने दिए जाएंगे, तब तक जनजीवन सामान्य नहीं हो पाएगा।
22मई/ईएमएस