लेख

(विचार-मंथन) राजनीति किस करवट (लेखक- सिद्धार्थ शंकर / ईएमएस)

02/05/2021


कोरोना के रिकॉर्ड मामलों के बीच 62 दिन चली चुनाव प्रक्रिया के बाद रविवार को पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के चुनाव नतीजे आ गए। बंगाल में तृणमूल, केरल में एलडीएफ और असम में भाजपा सरकार बना रही है। तमिलनाडु में जरूर बदलाव दिखा है। वहां द्रमुक सरकार बन रही है। चुनाव में कांग्रेस उसके साथ है। पुडुचेरी में मामला जरूर फंसा दिख रहा है। हालांकि, वहां एनडीए सरकार में आएगी, यह तय है। तमिलनाडु में एमके स्टालिन का जादू चल गया है। द्रविड़ राजनीति के पुरोधा डीएमके के गठबंधन ने निर्णायक बढ़त बना ली। पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले उसे 35 से 40 सीटों का फायदा हुआ है। तमिलनाडु में कई दशकों बाद पहली बार करुणानिधि और जयललिता की गैरमौजूदगी में चुनाव हुए। ऐसे में डीएमके के इस प्रदर्शन से स्टालिन इन दो दिग्गजों के बाद राज्य के सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित हो जाएंगे। डीएमके के एमके स्टालिन और एआईडीएमके के ईके पलानीस्वामी के अलावा एनटीके के सीमन, एमएनएम के कमल हासन और एएमएमके के टीटीवी दिनाकरण राज्य में मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी माने जा रहे थे। 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में 2016 में एआईडीएमके ने 134 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद जयललिता लगातार दूसरी बार कुर्सी पर बैठीं। पिछले चुनाव में करुणानिधि की अगुवाई वाली ष्ठरू्य के खाते में 98 सीटें आई थीं। 5 दिसंबर 2016 को जयललिता के निधन के बाद ओ पनीरसेल्वम को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन वो सिर्फ 73 दिन ही कुर्सी पर रह सके। 16 दिसंबर 2017 को ई पलानीस्वामी राज्य के सीएम बने। इसके बाद से ही एआईडीएमके की कमान पलानीस्वामी के हाथ में है। वहीं 59 साल के सर्बानंद सोनोवाल पर असम की जनता ने फिर विश्वास जताया है। सोनोवाल लगातार दूसरी बार यहां मुख्यमंत्री बनते दिख रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो असम में पहली बार होगा जब एक ही चेहरा दूसरी बार मुख्यमंत्री पद पर काबिज होगा। 1946 से शुरू हुई असम की सियासत में अब तक कोई भी ऐसा नहीं रहा है जो दो बार मुख्यमंत्री बना हो। सोनोवाल पहली बार यहां 24 मई 2016 को मुख्यमंत्री बने थे। भाजपा ने यहां असम गण परिषद और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिब्रल के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। दूसरी ओर कांग्रेस न कई दलों के साथ मिलकर अपने कैंडिडेट्स मैदान में उतारे थे। लेफ्ट पार्टियों का जनाधार अब केवल केरल में ही बचा है। इसलिए लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के लिए सरकार बचाने की सबसे बड़ी चुनौती थी। यहां कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माक्र्सवादी) के साथ 12 अन्य दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा था। कहा जा रहा है कि पिनाराई विजयन लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि लेफ्ट पार्टियां किसी नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने पर भी विचार कर रही हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि विजयन की उम्र ज्यादा हो रही है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जारी वोटों की गिनती में अब तक आए रुझानों में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस हैट्रिक लगाती हुई दिख रही है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मायने राष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल सकते हैं। राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में देखें तो पहली नजर में दिखता है कि ममता बनर्जी की हैट्रिक सीधे-सीधे राहुल गांधी को टेंशन दे सकती है।
02मई/ ईएमएस