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(विचार-मंथन) 4 साल 4 माह में 43 लाख 68 हजार करोड़ भारत से विदेशों में (लेखक-सनत जैन/ईएमस)

18/09/2019

भारतीय अर्थव्यवस्था अभी तक के सबसे बड़े संकट के दौर से गुजर रही है। पिछले 5 वर्षों में भारत से लगभग 45 लाख करोड़ रुपया विदेशों में चला गया है। रिजर्व बैंक द्वारा जो हालिया जानकारी प्रकाशित की गई है। उसके अनुसार वर्ष 2014 15 में जब मनमोहन सरकार थी उस साल 1 लाख 32 हजार करोड़ रुपया भारत से विदेश ले जाया गया था। 2014 के बाद से केंद्र में मोदी सरकार है 2015-16 के वित्तीय वर्ष में 4.60 लाख करोड़ 2016 17 में 8.17 लाख करोड़ 2017- 18 में 11.33 लाख करोड़, 2018 -19 में 13.77 लाख करोड, तथा वित्तीय वर्ष के पिछले 4 माह में 5 .80 लाख करोड़ रुपया रिजर्व बैंक की अनुमति से भारत से बाहर जाकर विदेशों में निवेश किया, गया है। पिछले 5 वर्षों में भारत के रईसों ने बड़ी मात्रा में विदेशों में जाकर पैसा निवेश किया, वहीं की नागरिकता भी ले ली।
रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार द्वारा पिछले 5 वर्षों में भारतीय रईसों द्वारा बड़े पैमाने पर देश का पैसा विदेशों में ले जाकर निवेश किया है। सरकार और रिजर्व बैंक ने इस मामले में चुप्पी साध रखी थी यह बड़ा आश्चर्य का विषय है। भारत सरकार विदेशों में जाकर वहां के उद्योगपतियों को भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रही थी। वही भारत के रईस भारत से पैसा निकाल कर विदेशों में निवेश कर रहे थे परिणाम स्वरूप पिछले 5 वर्षों में सबसे कम विदेशी निवेश भारत में हुआ है। इसके बाद भी भारत सरकार द्वारा कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई।
भारतीय शेयर बाजार में पिछले 5 वर्षों में कृत्रिम तेजी के माध्यम से निवेशकों ने भारी मुनाफा वसूली की है। भारतीय उद्योग धंधे जब आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। बैंकों का एनपीए लगातार बढ़ रहा था। बड़ी संख्या में कंपनियां दिवालिया हो रही थी। उसके बाद भी शेयर बाजार में तेजी बनी रही । मुनाफावसूली का यह पैसा बड़े पैमाने पर भारतीय उद्योगपतियों ने भारत से निकाल कर विदेशों में निवेश किया है। इस गड़बड़ झाले में भारतीय जीवन बीमा निगम राष्ट्रीय कृत बैंकों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों तथा पीएफ का भी अरबों रुपया खुलेआम शेयर बाजार के माध्यम से लूट लिया गया
अब बाजार में पैसा नहीं है। बैंकों के पास भी नगदी नहीं है। बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम की बहुत बड़ी राशि शीर्ष जो कंपनियों में निवेश की गई थी। शेयर बाजार की गिरावट के साथ इन कंपनियों और बैंकों का घाटा लगातार बढ़ रहा है। देश में नगदी संकट के कारण सभी सेक्टर आर्थिक मंदी का शिकार हैं। इसके बाद भी सरकार वास्तविकता को यदि अनदेखा कर रही है, तो यह भारत के लिए बहुत बड़ा संकट माना जा सकता है। करोड़ों की संख्या में पहले ही बेरोजगार देश में घूम रहे थे। वर्तमान आर्थिक मंदी के कारण बड़ी तेजी के साथ उद्योग और व्यापार बंद हो रहे हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियां दिवालिया हो रही हैं। यदि यही स्थिति कुछ माह है। और रह गई तो देश भारी आर्थिक संकट में फंस जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अच्छे दिनों का वादा करके केंद्र की सत्ता में आए थे। पिछले 5 वर्षों में आर्थिक स्थिति शनै:शनै: खराब होती रही । जिसका असर मोदी की विश्वसनीयता और लोकप्रियता पर पड़ना तय है। इससे देश में अराजकता की भी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती हैं।
सोनी/18सितम्बर