क्षेत्रीय

शुरू हुआ कड़कनाथ का विस्तार

31/07/2020

पांच विकासखण्डों में एक साथ पालन किया गया
कृषि विज्ञान केन्द्र झाबुआ से बुलाये गये कड़कनाथ के चूजे
सागर (ईएमएस)। सागर जिले में आजीविका मिशन के माध्यम से मुर्गी पालन व्यवसाय को नया आयाम देने के लिए जिले में कड़कनाथ चूजों के पालन कार्य को विस्तारित किया गया है। पूर्व में झाबुआ से मात्र 10 कड़कनाथ के अण्डे बुलाकर उनसे चूजे तैयार किये गये थे और प्रायोगिक तौर पर यह देखने का प्रयास किया गया था कि क्या कड़कनाथ पालन की गतिविधि जिले की जलवायु में सफल हो सकेगी। इस डेमो के सफल परिणामों के आधार पर ही जिले में 450 चूजों के साथ व्यवसायिक स्तर पर कड़कनाथ पालन प्रारंभ किया गया है।
डॉ इच्छित गढ़पाले मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सागर के अनुसार कड़कनाथ ब्रीड झाबुआ समेत प्रदेश के संघन वन क्षेत्रों की परम्परागत प्रजाति है जिसके मीट और खून का रंग भी गहरा काला होता है। दरअसल इस प्रजाति में आयरन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो खासकर कुपोषित एनीमिक और रोगग्रस्त लोगों के लिए औषद्यि का काम करता है। ये प्रजाति जिले के वातावरण में आसानी से घुलने मिलने योग्य है। कड़कनाथ की मुर्गी अपने अण्डों को स्वयं सेने का काम नहीं करती है। यद्यपि इस हेतु देशी मुर्गी को सैरोगेट मदर की तरह इस्तेमाल करना पड़ता है। कड़कनाथ चूजे को कृषि विज्ञान केन्द्र झाबुआ से बुलाया जाकर देवरी रहली, बण्डा, मालथौन, जैसीनगर और बीना विकासखण्ड में इन चूजों को पलवाया गया है। जिले में मुर्गी पालन की संभावनाओं को देखते हुए स्व. सहायता समूहों से जुड़े परिवारों के यहां क्लस्टर बनाकर मनरेगा के अंतर्गत मुर्गी शेड का निर्माण भी कराया जा रहा है।
बण्डा के ग्राम फतेहपुर में रूपा देवी लक्ष्मी स्व. सहायता समूह ने 100 चूजों से अपनी इकाई शुरू की है यद्यपि वर्तमान में उनके पास 95 बच्चे ही जीवित बचे हैं जो पूर्णत: स्वस्थ हैं। ऐसा अनुमान है कि इन बच्चों की लगभग आधी आबादी मादा हो सकती है। जिससे तीन माहों के उपरांत अण्डे मिलना प्रारंभ हो जायेगा। इन्हीं अण्डों से नये चूजे तैयार किये जायेंगे। और नवीन इकाईयों की स्थापना की जायेगी। बण्डा विकासखण्ड में 7 मुर्गी शेड की प्रशासकीय स्वीकृति जारी हो चुकी है। सुरेन्द्र खरे मुख्य कार्यपालन अधिकारी बण्डा ने बताया कि ग्राम शेखपुर, फतेहपुर, हिण्डोरिया में गणेश, लक्ष्मी, राम स्व. सहायता समूहों के एक एक सदस्य को प्रारंभिक इकाईयों की स्थापना के लिए मुर्गी शेड स्वीकृत किये गये हैं। विकासखण्ड प्रबंधक गोपाल पटैल ने बताया कि हितग्राहियों का तकनीकी प्रशिक्षण ऑनलाइन के माध्यम से कृषि विज्ञान केन्द्र झाबुआ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के द्वारा आगामी सप्ताह में संपादित होना है। मालथौन विकासखण्ड के ग्राम किशनगढ में भी 40 चूजों से एक इकाई प्रारंभ कर दी गई है। विकासखण्ड देवरी के ग्राम हरदुली में सरस्वती समूह की सुमन रानी कोरी, पूजा समूह की श्रीमती पूजा देवी कोरी के यहां 50-50 चूजों से इन इकाईयों को प्रारंभ किया गया है। ज्ञातव्य है कि ये दोनों ही हितग्राही पूर्व से मुर्गी पालन की गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। ग्राम हरदुली ग्राम पंचायत खकरिया में 25 परिवार ड्रायलर मुर्गी पालन का कार्य कर रहे हैं। कड़कनाथ की इकाईयां भी अगली जनरेशन के आने पर प्रारंभ कर दी जावेंगी। हेमेन्द्र गोविल मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद देवरी ने बताया कि मुर्गी पालक इन परिवारों के यहां मनरेगा के अंतर्गत मुर्गी शेड निर्माण के प्रस्ताव बुलाये गये हैं। ताकि कड़कनाथ चूजों के पालन की गतिविधि को व्यवसायिक स्तर पर देवरी विकासखण्ड में प्रारंभ किया जा सके।
प्रवीण/31/07/2020