लेख

(विचार-मंथन) परमाणु युद्ध का खतरा (लेखक- सिद्धार्थ शंकर/ईएमएस)

10/09/2019

अमेरिका के पास दशकों से ऐसे परमाणु हथियार हैं जो इतनी भयानक तबाही कर सकते हैं कि धरती का कोई हिस्सा इंसान के रहने लायक भी न रह जाए। अमेरिका के हथियारों का जखीरा ब्रिटेन के मुकाबले 31 गुना और चीन के मुकाबले 26 गुना बड़ा है। वाशिंगटन स्थित संस्था-आम्र्स कंट्रोल एसोसिएशन की हाल की रिपोर्ट के अनुसार केवल रूस ही है जो परमाणु शक्ति के मामले में फिलहाल अमेरिका से आगे है। अमेरिका के पास कुल छह हजार आठ सौ परमाणु हथियार हैं जबकि रूस के पास सात हजार ऐसे हथियार हैं। अमेरिका और रूस दो ऐसे देश हैं जिनके पास परमाणु हमले के लिए जरूरत से ज्यादा हथियार हैं। दोनों के पास दुनिया में मौजूद कुल परमाणु हथियारों का 90 फीसदी हिस्सा है। इस सूची में तीन सौ परमाणु हथियारों के साथ फ्रांस तीसरे नंबर पर है। पूर्व में ऐसे हथियार केवल प्रतिरोधक उपायों के तौर पर देखे जाते थे। लेकिन सबसे खतरनाक बात ऐसे हथियारों की सामग्री की बढ़ती खोज है, जिससे परमाणु युद्ध का नया खतरा सामने आ गया है। इस कारण परमाणु हथियारों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। पाकिस्तान हमेशा भारत को परमाणु युद्ध के लिए उकसाता रहा है। इसके लिए दोनों देश कम से कम पांच बार परमाणु युद्ध के कगार पर पहुंच चुके थे। परमाणु हथियारों युग में भारत की शुरुआत 1974 में हुई थी। इसके बाद 1998 में भारत ने दूसरी बार परमाणु परीक्षण किया था। इस समय भारत-पाक के बीच तनाव चरम पर है। पाकिस्तान परमाणु युद्ध की धमकी तक दे चुका है। रक्षा विशेषज्ञ भी आशंका जताते रहे हैं कि यदि भारत पाकिस्तान पर कोई कठोर सैनिक कार्रवाई करता है तो यह स्थिति पूर्णकालिक युद्ध का रूप ले सकती है। इसका अंत एक भयानक परमाणु युद्ध में हो सकता है।
आज के जमाने में परमाणु युद्ध की क्या कीमत चुकानी पड़ सकती है, इसका अंदाज लगाना बहुत मुश्किल है। इस समय दोनों देशों के बीच काफी तनाव है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि युद्ध होगा ही। अगर गलती से भी ऐसा होता है तो इसका परिणाम बहुत भयानक होगा। परमाणु युद्ध से होने वाली तबाही का मंजर कितना भयानक होगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। बात सिर्फ हिंदुस्तान और पाकिस्तान की नहीं, दांव पर आधी दुनिया होगी। भारत और पाकिस्तान के पास जो परमाणु बम हैं वे हिरोशिमा पर गिराए गए बम के बराबर ही हैं। ये बम जैसे ही गिरेंगे सबसे पहले इनकी गर्मी, तपिश और विकिरण लोगों की जान ले लेंगे। इसके बाद जो बच जाएंगे उनके लिए भी जीना आसान नहीं होगा।
ईएमएस/ 10 सितम्बर 2019