लेख

(‎विचार मंथन) आतंक की समस्या (लेखक - ‎सिद्धार्थ शंकर/ईएमएस)

21/11/2020

पांच देशों के संगठन ब्रिक्स के मंच से प्रधानमंत्री ने एक बार फिर आतंकवाद को रोकने के लिए एकजुटता की दरकार रेखांकित की। ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका सदस्य देश हैं। इस संगठन का गठन आपसी व्यापार बढ़ाने और सुरक्षा संबंधी विषयों पर सहयोग के लिए हुआ था। माना गया था कि ये पांचों देश अगर परस्पर सहयोग से काम करेंगे, तो दुनिया की आर्थिक महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका को चुनौती दी जा सकती है। इस संगठन का लाभ भी इन देशों को मिलता रहा है। मगर आतंकवाद के मसले पर अपेक्षित कामयाबी नहीं मिल पाई है। प्रधानमंत्री ने संगठन के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि उन देशों को भी इसका जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, जो आतंकवाद को पनाह देते, पोसते रहे हैं। इस समस्या से लडऩे के लिए संगठित प्रयास की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने इससे संबंधित एक रणनीति भी पेश की। यह बात अंतरराष्ट्रीय मंचों से बार-बार दोहराई जाती रही है कि आतंकवाद के खिलाफ दुनिया के तमाम देशों को एकजुट होने की जरूरत है। यह भी छिपी बात नहीं है कि आतंकवाद की वजह से बहुत सारे देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है। मगर कुछ देश अपनी साम्राज्यवादी नीतियों के चलते संगठित नहीं हो पाते।
इस समस्या से पार पाने में संयुक्त राष्ट्र का पक्षपातपूर्ण रवैया भी आड़े आता रहा है। जहां अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के हित सीधे प्रभावित होते नजर आते हैं, वहां तो संयुक्त राष्ट्र महासभा इस समस्या को लेकर गंभीर नजर आता है, पर जहां उनके ऊपर सीधा असर नहीं पड़ता वहां शिथिलता बरती जाती है। इसलिए प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की नीतियों में बदलाव की उचित ही मांग उठाई। यह छिपी बात नहीं है कि भारत को आतंकी चुनौतियां सबसे अधिक पाकिस्तान से ही अधिक मिलती हैं।
इसके ढेर सबूत हैं, जो भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा के सामने भी पेश कर चुका है। भारत में हुई तमाम आतंकवादी घटनाओं के सरगना पाकिस्तान में पनाह पाए हुए हैं और वहां आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर चलाते हैं। इसके पुष्ट प्रमाण भी सौंपे जा चुके हैं। मगर संयुक्त राष्ट्र महासभा के सदस्य देश उसके खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई करने से परहेज करते रहे हैं। ब्रिक्स संगठन के सदस्यों में चीन भी शामिल है। भारत के साथ उसके संबंध इन दिनों कुछ अधिक कड़वे चल रहे हैं। वह पाकिस्तान को लेकर ज्यादा नरम रवैया अपनाता रहा है। जब भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान पर अंकुश लगाने की बात उठी है, चीन उसका विरोध करता रहा है। इसलिए प्रधानमंत्री की बातों का उस पर कितना असर पड़ेगा, कहना मुश्किल है।

पाकिस्तान दक्षिण एशिया में आतंकवाद की सबसे बड़ी पनाहगाह बन चुका है। वहां आतंकवादियों को प्रशिक्षित करने वाले सरगना खुलेआम सड़कों पर घूमते हैं और दुनिया में जगह-जगह अपनी साजिशों को अंजाम देने का प्रयास करते हैं। उसामा बिन लादेन तक ने वहीं पनाह ले रखी थी, जब अमेरिकी दस्ते ने उसे मार गिराया। पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों से संबंधित तथ्यों से दुनिया का कोई देश अनजान नहीं है।
सब यह भी जानते हैं कि पाकिस्तान किस तरह भारत के खिलाफ आतंकवादियों का इस्तेमाल करता रहा है। फिर भी उसके खिलाफ कोई स्थायी और सख्त कदम उठाने से बचते रहे हैं। जब तक अमेरिका का उससे स्वार्थ सधता रहा, वह भी उसके प्रति नरम रवैया अख्तियार किए रहा। अब चीन उसे शह देता रहता है। ऐसे में प्रधानमंत्री की ताजा अपील ज्यादा गंभीर है।
ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि यह किसी एक देश की समस्या नहीं है बल्कि पूरी दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती है तो इसे सभी को गंभीरता से लेना होगा। आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं है बल्कि पूरी दुनिया और मानवता की सबसे बड़ी चुनौती है। यह दूसरा मौका है जब मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। इससे पहले उन्होंने बतौर प्रधानमंत्री पांच साल पहले 2014 में संयुक्त राष्ट्र में अपना पहला भाषण दिया था। भारत ने 1996 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर एक व्यापक समझौते (सीसीआईटी) का मसौदा पेश किया था लेकिन सदस्य देशों के बीच आम सहमति नहीं बन पाने के कारण इस पर बात आगे नहीं बढ़ पाई। सीसीआईटी में आंतकवाद के सभी प्रारूपों को अपराध घोषित करने तथा आतंकवादियों, उनके वित्तपोषकों और समर्थकों की पैसों, हथियारों और सुरक्षित ठिकानों तक पहुंच को रोकने की बात कही गई है।
मोदी ने कहा, आतंकवाद के मुद्दे पर हम एकजुट नहीं हैं जिसके कारण उन सिद्घांतों का नुकसान होता है जिनके आधार पर संयुक्त राष्ट्र का गठन हुआ है। भारत ने दुनिया को युद्घ का नहीं बल्कि शांति का संदेश दिया है। मानवता के खातिर दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में बड़ी संख्या में भारतीय सैनिक शहीद हुए हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सत्य और अहिंसा का संदेश दुनिया में शांति, विकास और प्रगति के लिए आज भी प्रासंगिक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष पूरी दुनिया गांधी की 150वीं जयंती मना रही है। उन्होंने कहा कि भारत में एकल इस्तेमाल प्लास्टिक को पूरी तरह मुक्ति दिलाने के लिए व्यापक अभियान चल रहा है। आतंकवाद आज विश्वके सामने सबसे बड़ी समस्या है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आतंकवादियों को समर्थन और सहायता देने वाले देशों को भी दोषी ठहराया जाए और इस समस्या का संगठित तरीके से मुकाबला किया जाए। इसके लिए डब्ल्यूएचओ, डब्ल्यूटीओ और आईएमएफ जैसे इंस्टीट्यूशन्स में सुधार होना चाहिए।
.../राजेश/ 21 नवम्बर 2020