चुनावी विशेष


मध्यप्रदेश विधानसभा 2018 विशेष

इंदौर में बगावत और असंतोष बिगाड़ेगा चुनावी गणित (इंदौर विधानसभा चुनाव - 2018 ) इंदौर ( ईएमएस)। इंदौर के चुनावी परिदृश्य में भाजपा में ताई-भाई के शीत युद्ध का पटाक्षेप शिव के ब्रह्मास्त्र से भले ही हो गया हो, किन्तु असंतोष का लावा भीतर-भीतर खदबदा रहा है। उधर कांग्रेस में भी अंतिम समय में सीट बदलाव से खफा प्रीती अग्निहोत्री जैसे कांग्रेसियों ने बदलाव की बयार का रुख मोड़ा है। इस क्षेत्र में 24 लाख 42 हजार 690 मतदाता दर्ज हैं। पिछले चुनाव 2013 में 21 लाख 65 हजार मतदाता थे। इस लिहाज से पांच साल में पौने तीन लाख मतदाता बढ़ गए हैं। पिछले चुनाव में बागियों ने मंत्री-विधायकों के साथ नेताओं की परेशानियां बढ़ा दी थी। जोन की सात प्रमुख विधानसभा सीटों पर 8 बागियों ने खम ठोंका था । इससे भाजपा-कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों को नुकसान हुआ था। फिर भी भाजपा ने कांग्रेस को यहां करारी शिकस्त दी थी । जिले की नौ में से आठ सीटों पर पार्टी के उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया। इससे पहले 1992 में भाजपा ने जिले की आठों सीटें जीती थीं। राऊ सीट जरूर भाजपा के हाथ से चली गई, लेकिन इंदौर-3, सांवेर और देपालपुर कांग्रेस से छीन ली। जिले में सबसे ज्यादा मतों से रमेश मेंदोला जीते थे । जिले में पहली बार ऐसा हुआ कि पार्टी के सभी उम्मीदवार 10 हजार से ज्यादा वोटों से जीते थे। वर्ष 2003 में इंदौर-4 से लक्ष्मणसिंह गौड़ ने 45 हजार 625 वोटों से चुनाव जीतकर रिकॉर्ड कायम किया था। लेकिन 2013 के चुनाव में पार्टी के दो प्रत्याशी सुदर्शन गुप्ता और मेंदोला ने 50 हजार से ज्यादा वोटों से जीतकर इतिहास रचा था । मेंदोला जितने वोट से जीते, उससे आधे भी कांग्रेस प्रत्याशी को नहीं मिले। ऐसे ही गुप्ता जितने वोट से जीते, उतने वोट भी निकटत...