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नोटबंदी के पहले जमा मोटी रकमों की भी जांच करेगा आय कर विभाग

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नई दिल्ली (ईएमएस)। नोटबंदी के ऐलान के पहले जिन लोगों ने बड़ी मात्रा में नकदी जमा की थी, उनके पीछे भी टैक्स डिपार्टमेंट लग गया है। टैक्स विभाग आठ नवंबर से पहले इस तरह का कैश डिपॉजिट करने वालों से वित्त वर्ष 2010-11 से अब तक के ब्यौरों के बारे में सवाल कर रहा है। मकान खरीदने वाले ऐसे लोगों को भी नोटिस भेजे गए हैं, जिनकी ओर से घोषित खरीद मूल्य गाइडेंस वैल्यू से काफी कम पाया गया है। अगर टैक्स अधिकारियों को कोई जवाब नहीं मिला या जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो इसके मूल्य की फिर से समीक्षा की जाएगी। 
एक वरिष्ठ आय कर अधिकारी ने कहा, 'उपलब्ध सूचना के आधार पर मामलों को ज्यादा जोखिम और कम जोखिम की दो श्रेणियों में बांटा गया है। ज्यादा जोखिम वाले मामलों पर तुरंत कार्रवाई करने होगी। उन्होंने कहा सन 2010-11 से जुड़े मामलों में समय की पाबंदी भी होगी, लिहाजा उन पर तत्काल ध्यान देना होगा। इन मामलों को उच्च प्राथमिकता में रखा गया है। विभाग ने ऐसे लोगों और इकाइयों से कहा है कि वे अपने परमानेंट एकाउंट नंबर और संबंधित वित्त वर्ष के लिए फाइल किए गए रिटर्न की जानकारी दें।
कर अधिकारियों के पास अधिकार है कि आय कर अधिनयम की धाराओं 147 और 148 के तहत वे ऐसी किसी भी कर योग्य आमदनी का असेसमेंट या रीअसेसमेंट कर सकते हैं, जिसका अब तक असेसमेंट नहीं किया गया हो। प्रॉपर्टी से जुड़े लेन-देन में कर अधिकारियों ने गाइडेंस वैल्यू और डिक्लेयर्ड वैल्यू के अंतर पर फोकस किया है। अधिकारियों की दलील यह है कि इस अंतर की जानकारी नहीं दी गई, नहीं तो इसे चुकाना पड़ा होता। इस तरह बायर और सेलर, दोनों ही जांच के घेरे में आ गए हैं। कर चोरों को पकड़ने की मुहिम के तहत इनकम टैक्स विभाग को बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस सहित कई स्रोतों से जानकारी मिल रही है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने नोटबंदी के बाद ऑपरेशन क्लीन मनी अभियान शुरू किया था और बड़े कैश डिपॉजिट्स के ई-वेरिफिकेशन के लिए उसने 18 लाख लोगों की पहचान की थी। इनके अलावा साढ़े पांच लाख और लोगों की पहचान इस अभियान के दूसरे चरण में की गई है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज ऐसे लोगों और इकाइयों को पकड़ने के लिए डेटा एनालिटिक्स का सहारा ले रहा है, जिन्होंने पहले उचित मात्रा में टैक्स जमा नहीं किया था। विशेषज्ञों का कहना है कि डेटा माइनिंग और टैक्स विभाग के पास उपलब्ध जानकारी से अब टैक्स बेस बढ़ाने में मदद मिलेगी। 
अनिरुद्ध, ईएमएस, 14 सितंबर 2017
 

 

Admin | Sep 13, 2017 13:21 PM IST
 

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