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फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर लिया मेडिकल कालेजों में प्रवेश

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राजस्व अधिकारियों की जांच पर हो रहे सवाल खड़े  
भोपाल (ईएमएस)। मूल निवासी प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से बनवा कर दो राज्यों की मैरिट सूची में आए कुछ छात्रों ने मप्र के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन ले लिया है। इन छात्रों को प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिलने से सरकार द्वारा बैठाए गए राजस्व अधिकारियों की जांच पर सवालिया निशान लग रहे हैं। छात्रों ने भोपाल और इंदौर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लिया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों कई ऐसे छात्रों के नाम सामने आए थे, जो फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर दो राज्यों की मैरिट सूची में शामिल हो गए थे। नियमानुसार एक छात्र एक ही राज्य का मूल निवासी हो सकता है। सीबीएसई द्वारा आयोजित नीट परीक्षा के रिजल्ट के आधार पर राज्यों ने स्टेट कोटे की एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश के लिए पात्रता सूची जारी की थी। छात्रों को इन सीटों पर प्रवेश के लिए मूल निवासी प्रमाण पत्र देना होता है।
       सैकड़ों विद्यार्थियों ने दो राज्यों से मूल निवासी प्रमाण पत्र बनवाकर स्टेट कोटे की सीटों पर प्रवेश के लिए आवेदन किया था। इनमें से कुछ छात्रों ने प्रवेश भी ले लिया। हालांकि यह साफ नहीं है कि इन छात्रों ने किस राज्य से फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र बनवाया है।चइस बारे में चिकित्सा शिक्षा विभाग ज्वाइंट डायरेक्टर(काउंसिलिंग प्रभारी) डॉ. शशि गांधी का कहना है कि हमारे पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिसमें हम ये पता कर सकें कि छात्र के पास कितने राज्यों के मूल निवासी हैं। छात्र ने हमें जो मूल निवासी दिखाया, हम उस पर ही भरोसा कर सकते हैं। हमने काउंसलिंग सेंटर पर मूल निवासी प्रमाण पत्र की जांच करने को कहा था, लेकिन अभी हमें कहीं से भी फर्जी प्रमाण पत्र बनाने की सूचना नहीं मिली है। 
सुदामा/12अगस्त2017
 
Admin | Aug 12, 2017 13:26 PM IST
 

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