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कम्पनियां डाल-डाल, तो चोर पात-पात

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(अजित वर्मा)
पेट्रोलियम उत्पादों का विपणन करने वाली कंपनियों और इसमें इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के निर्माताओं की बैठक में तय किया है कि गाडिय़ों में डीजल और पेट्रोल भरने वाली मशीनों को इलेक्ट्रानिक तरीके से सील किया जाएगा, ताकि उसकी कार्यविधि में छेड़छाड़ करके ग्राहकों को चूना नहीं लगाया जा सके। दावा किया जा रहा है कि इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सील करने के बाद मशीनों के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी। लेकिन जिस देश में साहूकार डाल-डाल तो चोर पात-पात  चलते हों, वहां इसका रास्ता भी चोर निकाल ही लेंगे।
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में कई पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों के साथ माप में धोखाधड़ी करने के मामले सामने आने के बाद कम्पनियों के प्रबंधन ने यह फैसला लिया। इन मामलों में ग्राहकों को पंप पर लगे डिस्प्ले से कम फ्यूल देकर उनकी जेब काटी जा रही थी। इसमें पल्सर कार्ड के जरिए गोलमाल करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक चिप का यूज किया जा रहा था। इस कार्ड से पता चलता है कि पंप के जरिए कितना फ्यूल दिया जा रहा है। उपभोक्ता मामलों के एक विभागीय अधिकारी के अनुसार  वजन और माप के नियमों के अनुसार पल्सर कार्ड को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से सील किए जाने का प्रावधान है। उनको फिलहाल मेकैनिकल तरीके से सील किया जा रहा है। इसलिए यह काम कोई अतिरिव्त खर्च बिना तुरंत किया जा सकता है।
जिन मशीनों से वाहनों में ईंधन डाला जाता है, उसमें एक पल्सर कार्ड भी लगा होता है। इसको लीगल मेट्रोलॉजी डिपार्टमेंट सील करता है। अब ई-सीलिंग से सुनिश्चित हो सकेगा कि इसके साथ टेक्निशियन छेड़छाड़ नहीं कर सकें। एक चिप कस्टमर को हर लीटर पर 50 से 70 मिलीलीटर ईंधन का नुकसान करा सकता है। ई-सीलिंग से इन सब पर लगाम लगाई जा सकेगी।  
 एक पल्स एनहैंसर डिवाइस लगभग 50,000 रुपये में आती है। इसके जरिए पंप मालिक ग्राहकों को हर महीने 12 से 15 लाख रुपये का चूना लगा सकता है। इसको देखते हुए अब फैसला किया गया है कि राज्यों के माप तौल विभाग, ऑइल कंपनियों और इक्विपमेंट निर्माओं के कार्यकारी मिलकर इलेक्ट्रॉनिक सीलिंग का काम करेंगे। इसमें वाहनों में ईंधन डालने वाली मशीनों को पासवर्ड के जरिए सुरक्षित किया जाएगा।  
मेकैनिकल सीलिंग की व्यवस्था भी पूर्ववत् जारी रहेगी। लेकिन ई-सीलिंग अतिरिक्त प्रबंध के रूप में किया जाएगा। बैठक में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारियों के अलावा तेल विपणन कंपनियों और उपकरण निर्माताओं केप्रतिनिधि शामिल हुए। उपभोव्ता मामलों के मंत्रालय सूत्रों के अनुसार दोनों मंत्रालय इस काम को प्रमुखता दे रहे हैं। इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू किया जाएगा।
उम्मीद की जाना चाहिए कि अब पेट्रोल पम्पों के संचालक, प्रबंधक या कर्मचारी चोरी करके उपभोक्ताओं की जेब कतर नहीं पायेंगे।  
....ईएमएस/सोनी/ 17 जुलाई 2017
 

Admin | Jul 17, 2017 11:22 AM IST
 

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