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(विचार मंथन) सत्ता पक्ष की बौखलाहट को उजागर करती छापेमारी

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डॉ. हिदायत अहमद खान  
इन दिनों विभिन्न राज्यों में राष्ट्रीय स्तर के कद्दावर कहे जाने वाले विपक्षी नेताओं और उनके नाते-रिश्तेदारों समेत करीबियों पर सीबीआई और इंकमटैक्स डिपार्टमेंट की छापामार कार्रवाई कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में सीबीआई ने कांग्रेस के वरि‰ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के अनेक ठिकानों पर छापामार कार्रवाई की। इसकी खबर आम होते ही विपक्षी दल के नेता केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस नेता हमलावर हो सरकार पर राजनीतिक द्वेष के आधार पर कार्रवाई करने का इल्जाम लगा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव इसे केंद्र सरकार का नया एलायंस नाम देकर चुटकी ली है। उनका कहना है कि सरकार ने इंकमटैक्स और सीबीआई जैसे विभागों को मिलाकर नया एलायंस बना लिया है और विपक्ष को जड़ से खत्म कर देना चाहती है। इससे पहले लालू यादव को अनेक मामलों में घेरा गया, इसके बाद उनके बेटे और बड़ी बेटी मीसा यादव को आरोपों में लिया गया और जांच तक बैठा दी गई। वहीं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और उनके भाई समेत पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी ऐसी कार्रवाइयों से दो-चार होती हुई दिखाई दे रही हैं। इससे यह लगने लगा है कि मोदी सरकार किसी भी कीमत पर विपक्ष को एक होने का कोई मौका नहीं देना चाहती। यही वजह है कि वह लगातार सत्ता का दुरुपयोग कर रही है और विपक्ष को कमजोर करने में लगी हुई है। विपक्ष के इस आरोप में दम है क्योंकि देश में अगले राष्ट्रपति का चुनाव होना है, ऐसे में विपक्ष लामबंद होता नजर आ रहा है। एक महागठबंधन की ओर बढ़ते विपक्ष के कदम सरकार को पसंद नहीं आ रहे हैं। उसे यह नजर आने लगा है कि यदि महागठबंधन बनता है और वह अपना उम्मीदवार राष्ट्रपति चुनाव मैदान में उतारता है तो फिर जीत भले ही किसी की हो, लेकिन यह तय है कि 2019 के आमचुनाव में यह महागठबंधन भाजपा के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर देगा। तब यही गठबंधन पूरी ताकत के साथ भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने की हर संभव कोशिश करेगा। इसलिए पहले लालू, फिर माया और ममता के साथ ही साथ अब चिदंबरम के बेटे समेत अनेक विपक्षी नेता छापामार कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं। इस संबंध में कार्ति चिदंबरम का कहना है कि उनके ऊपर जो सीबीआई का केस दर्ज हुआ है वह राजनीतिक बदले की भावना से ओतप्रोत है। जबकि एफआईआर के मुताबिक कार्ति चिदंबरम पर आरोप है कि उसके प्रभाव में एफआईपीबी बोर्ड ने कंपनी के घोटाले को नजरअंदाज किया और वित्त मंत्रालय के कुछ अधिकारियों ने इस पूरे मामले मे आपराधिक षडयंत्र किया। यही नहीं बल्कि आयकर विभाग की जांच शाखा को भी गलत जानकारी देकर मामले की जांच रुकवा दी गई। इस पर कार्ति का कहना था कि सारे आरोप बेबुनियाद हैं। सही बात तो यह है कि उन्हें राजनीतिक और व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। खास बात यह है कि बेटे के खिलाफ हो रही इस कार्रवाई पर पी. चिदंबरम मीडिया के सवालों का जवाब देना उचित नहीं समझे और उन्होंने खामोशी अख्तियार कर ली। इसका मतलब यही है कि उन्होंने मामले को राजनीतिक स्तर पर निपटाने या बयानवाजी करने से बचने को बेहतर माना है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी कार्ति के बयान से इत्तिफाक रखते हुए आशंका जताई है कि इसकी आंच पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम तक भी पहुंच सकती है। यहां विचारणीय बात तो यह भी है कि कार्ति पर पीटर मुखर्जी के आईएनएक्स मीडिया को फायदा पहुंचाने के बदले रिश्वत लेने का आरोप है। चूंकि वर्तमान में पीटर मुखर्जी और उनकी पत्नी इंद्राणी मुखर्जी अपनी ही बेटी शीना की हत्या मामले में जेल में बंद हैं अत: आरोपों को सामान्य में नहीं लिया जा सकता है। न्याय की आस लगाए बैठे लोगों का तो यही कहना है कि इस पर कार्रवाई होना लाजमी है। सरकार पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई के आरोप लगाना अपनी जगह सही हो सकते हैं, लेकिन जब मामला संगीन आरोपों से जुड़ा हुआ हो तो सीबीआई की छापामार कार्यवाही पर भी सवाल सिर्फ राजनीतिक स्तर पर ही उठकर रह जाते हैं। जबकि सरकार जो चाहती है वह आसानी से करके दिखा देती है। यही वजह है कि राष्ट्रपति चुनाव से पहले पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम पर शिकंजा कसने के लिए उनके बेटे पर यह कार्रवाई की गई है। इसी प्रकार के और भी मामले हैं जिन्हें देखते हुए कह सकते हैं कि केंद्र सरकार महागठबंधन की सुगबुगाहट से इस कदर घबरा गई है और उसकी बौखलाहट इसी बात से उजागर हो जाती है कि उसने राजनीतिक द्वेषवश छापेमार कार्रवाईयां शुरू करवा रखी हैं। अगर ऐसा नहीं है तो फिर क्या कारण है कि बड़े-बड़े कारोबारी और उद्योगपतियों को बचाया जा रहा है और दूसरी तरफ राजनीतिक हस्तियों और उनसे जुड़े परिजनों व सगे-संबंधियों को निशाना बनाया जा रहा है!  
19मई/06.50 
 
Admin | May 19, 2017 12:01 PM IST
 

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