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क्या पाकिस्तान को लेकर चीन में अन्तर्द्वद्व है?

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(अजित वर्मा)
पाकिस्तान में लगातार भारी भरकम निवेश करता जा रहा चीन क्या अन्तर्द्वद्व का शिकार हो रहा है? अभी-अभी यह खबर आई थी कि चीन-पाकिस्तान-चीन आर्थिक गलियारे में किये जा रहे अपने निवेश की सुरक्षा  के लिए इतना चिन्तित है कि वह भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद के मुद्दे कश्मीर पर हस्तक्षेप भी कर सकता है।
दूसरी ओर चीन से आ रही खबरों के अनुसार  चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के कुछ वरिष्ठ विचारक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि चीन को अपने अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट को पूरा करने से पहले अन्य देशों के विवादों पर भी गौर करना चाहिए। उनका कहना है कि कम्युनिस्ट देश को चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारो (सीपीईसी) को पूरा करने में भारत की चिंताओं का भी ध्यान रखना चाहिए। यही नहीं उनका मानना है कि जब तक इन विवादों का समाधान नहीं हो जाता तब तक इन योजनाओं को अस्थाई रूप से रोका जा सकता है।
कास्गर-ग्वादर सीपीईसी प्रोजेक्ट चीन के राष्ट्रपति शी जिगपिंग का बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के अंतर्गत प्रमुख प्रोजेक्ट है। भारत लगातार इस प्रोजेक्ट को लेकर अपनी चिंताएं पड़ोसी देश के समक्ष उठाता रहता है जो कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरेगा। इस परिप्रेक्ष्य में चीन के थिंक टैंक एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज के अध्यक्ष मंडल के सदस्य झांग युनलिंग का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में दूसरे देशों के हित भी शामिल होते हैं। हमें समन्वय स्थापित करने की जरूरत है जिससे सभी पक्ष इसको मान सकें। अगर हम कोई संतुलन नहीं बना सकें तो इसको रोका जा सकता है। सीपीईसी पाक अधिकृत कश्मीर से गुजरने पर भारत की आपत्ति की पृष्ठभूमि में श्री झांग यह उदाहरण देते हैं कि मेकांग नदी पर नेविगेशन रूट के मामले में काफी समस्या आई थीं। हमने एक के बाद एक समस्या पर चर्चा की थी। हमें सीखने की जरूरत है। कभी-कभी सबक काफी बड़ा होता है। हम प्रोजेक्ट को रोक सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह हमेशा आसान नहीं होता है। किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट में कई देशों की ंिचताएं होती हैं। हमें संतुलन स्थापित करना चाहिए जो कि सभी पक्षों को मान्य हो। यदि किसी संतुलन तक नहीं पहुंच सकें तो प्रोजेक्ट को कुछ समय के लिए बंद कर देना चाहिए। किसी भी अंतरराष्ट्रीय परियोजना में इस तरह की जटिलताएं सामने आती ही हैं। चीन इस मामले में इतना सक्रिय है कि बीआरआई के सवाल पर उसने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया है। भारत इसमें रुचि नहीं ले रहा है। यही नहीं,भारत को इस परियोजना में शामिल करने के लिए भारत में चीन के राजदूत ने हाल ही एक भाषण में इस परियोजना का नाम बदलने  तक की पेशकश कर दी। तथापि, इस भाषण को साइट से जल्दी ही हटा भी दिया गया। 
दरअसल, भारत की आपत्ति कश्मीर पर अपनी सप्रभुता के दावे के कारण है। और, इसी को दृष्टिगत रख कर चीन बार-बार याद दिला रहा है कि वह कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच आपस का मामला मानता है। पर सवाल यही है कि चीन को कॉरिडोर बना रहा वह पाक अधिकृत कश्मीर से ही तो गुजर रहा है। (ईएमएस)
.../राजेश/12.20/19 मई 2017
 
Admin | May 19, 2017 12:00 PM IST
 

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